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कोई शिकायत नहीं

Posted On: 10 Feb, 2011 Others में

KADLI KE PAAT कदली के पातचतुर नरन की बात में, बात बात में बात ! जिमी कदली के पात में पात पात में पात !!

R K KHURANA

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कोई शिकायत नहीं

Koi Shikayat Nahi

राम कृष्ण खुराना

मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं ! क्योंकि मुझे मालूम है कि तुम भी मेरी ही तरह विवश हो ! कदाचित मुझसे भी अधिक ! तुमने मुझसे वादा किया था परंतु निभाया नहीं ! शायद याद ही न रहा होगा ! रहता भी कैसे ? यह समय ही ऐसा होता है ! कई बार पास रहने वाला भी  दूर हो जाता है ! और फिर वह याद ही नहीं आता ! तुम भी मुझे भूल गई होवोगी ! लगभग एक माह पूर्व तुमने मुझसे वादा किया था और मुझसे भी वादा पूरा करने का वचन लिया था ! इस पर भी तुमने अपनी बात नहीं रखी तो मैं क्या करता ? परंतु मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

शायद तुम्हें नहीं मालूम कि हर राखी और भैय्या दूज का त्यौहार मुझे तुम्हारी याद दिला देता है ! मेरी आंखों से मोटे-मोटे आंसू गिर पडते हैं ! तुम्हीं ने तो मेरी आंखों के आंसुओं को पोछा था हर वर्ष राखी तथा सिंदूर भेजकर ! तुमने ही तो मुझे ढाढस बंधाया था मेरी सूनी कलाई पर कच्चा धागा बांध कर ! तुमने ही तो मुझे साहस दिया था एक बहन का प्यार देकर ! तुम्हीं तो थी जिसने मुझे भाई कहा था ! बहन का प्यार पाकर मैं अपने सभी दुःख भूल गया था जैसे कुछ हुआ ही नहीं ! अपने दिल के सभी दर्द समेट कर अलग कर दिए थे मैंने ! जैसे कोई अपने घर से बेकार वस्तु निकाल कर बाहर फेंक देता है ! वो तुम्हीं तो थी जिसने मेरे घावों को भर दिया था ! जिसमें पीप के स्थान पर नया मास आ गया था ! वही घाव अब फिर रिस रहे हैं ! उन्हीं घावों पर अब मेरा हाथ बार बार पड जाता है ! तुमने उन घावों को अब फिर कुरेद दिया है ! लेकिन मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था तो तुम कितना रोई थी ! तुमने कितनी दुआएं मांगी थी ! कितनी मिन्नतें की थी ! भगवान से कितनी बार प्रार्थना की थी कि मेरे भैया को ठीक कर दो ! हर रोज़ तुम अस्पताल में मेरे लिए कुछ न कुछ बना कर लाती थी ! कभी देसी घी का हलवा, कभी खीर, कभी देसी घी के परांठें ! मेरे बेड से जाने का तुम्हारा दिल ही नहीं करता था ! नर्स कहती रहती थी कि अब मिलने का समय समाप्त हो गया है ! पर तुम किसी तरह से नर्स की मिन्नते करके थोडी देर और बैठने के लिए ऊसे मना लेती थी ! तुम्हें भी याद है न जिस दिन मेरा आपरेशन हुआ था उस दिन तुम कालेज ही नहीं गई थी ! उस दिन मेरे लिए विशेषरुप से देसी घी का सीरा बना कर लाई थी ! तुम्हारे पास बैठ कर मुझे कितनी शांति मिलती थी ! कितना साहस मिलता था ! परंतु आज परिस्थियों के कारण तुम मेरे सामने आने से भी कतराती हो ! फिर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

इस दुनिया ने इस पवित्र रिश्ते को भी बदनाम करना चाहा था ! भाई-बहन को भी यह समाज नहीं देख सकता ! कितने ताने मारे थे लोगों ने ! कितनी बातें की थी दुनिया ने हम दोनो के बारे में ! जितने मुंह उतनी बातें ! कोई कुछ कहता तो कोई कुछ ! इस पवित्र रिश्ते पर भी दाग लगाने से नहीं चूके थे यह समाज के “रिश्तेदार”! तुम तो एक दिन रोने ही लग गई थी ! तब मैंने तुम्हें सांतवना देते हुए कहा था जब हमारे दिल में कोई खोट नहीं तो तुम क्यों डरती हो ? सांच को आंच नहीं ! धीरे धीरे सबका मुंह बंद हो गया था ! परंतु अब विवशता के कारण तुम मुझे भाई भी नहीं कह सकती ! मुझसे बात भी नहीं कर सकती ! इतना होने पर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

मैं जानता हूं कि तुम्हारे दिल में भी टीस उठती होगी ! तुम भी सोचती होगी इस विडम्बना के बारे में ! शायद कभी तुम भी मेरे दुःख को याद करके दुःखी हो जाती होवोगी ! परंतु अब मैं तुम्हें बहन कहकर पुकारने के लिए भी तरस जाता हूं ! तुमसे अपना दुख भी नहीं बांट पाता ! मेरे नज़दीक रहकर भी तुम मुझे राखी बांधने नहीं आ सकती ! मेरे सामने से निकल जाने पर भी तुम मुझे भैय्या कहकर नहीं पुकार सकती ! फिर भी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

हां एक महीना पहले ही तो तुम मुझे अचानक गली में जाते हुए अकेली मिल गई थी ! मैंने तुम्हारी सगाई की तुम्हें बधाई दी थी तथा मिठाई की मांग की थी ! तुमने मुझे घर चलने के लिए कहा था ! जबकि तुम जानती थी कि किसी विशेष अवसर पर ही मैं तुम्हारे घर जा सकता था ! शायद विशेष अवसर पर भी नहीं ! तो भी मैंने मज़ाक में कह दिया था कि मैं तुम्हारी शादी पर आऊंगा अगर तुमने बुलाया तो ! तब तुमने गंभीर मुद्रा में ही उत्तर दिया था कि – “भैय्या, मैं तुम्हें स्पेशल इंवीटेशन दूंगी ! तुम जरुर आना !”  मैंने भी तुमसे वादा किया था और कहा था कि – “हां, अगर तुम मुझे विशेष निमंत्रण भेजोगी तो मैं अवश्य आऊंगा…..अवश्य !”

तुम्हारी शादी का दिन भी आ गया ! अभी तक मैं तुम्हारे विशेष निमंत्रण का इंतज़ार कर रहा हूं  परंतु तुम्हारा वो विशेष निमंत्रण नहीं आया ! विशेष क्या साधाराण भी नहीं आया ! ….और शादी का दिन भी बीत गया ! तुमने ही अपना वादा नहीं निभाया ! तुमने बुलाया ही नहीं अपनी शादी पर तो मैं कैसे आता ? आखिर तुम्हारे घर इतने दिनों के बाद आने का कोई न कोई बहाना तो चाहिये था ! शायद तुम्हारे सामने कोई विवशता रही होगी ! तुम मुझे बुलाना चाह कर भी बुला न पाई होवोगी ! फिर भी मेरे दिल में तुम्हारे प्रति वही श्रद्दा है, वही प्यार है ! तुम जहां भी रहो सुखी रहो ! मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं !

राम कृष्ण खुराना

R K KHURANA

9988950584

A-426, MODEL TOWN EXTN.

LUDHIANA (PUNJAB) INDIA

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