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'मोदी-ओबामा की जुगलबंदी'

Posted On: 25 Jan, 2015 Others में

YOUNG INDIAN WARRIORSयुवा भारत की दमदार आवाज : के.कुमार 'अभिषेक'

K.Kumar 'Abhishek'

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अमेरिकी राष्ट्रपति ‘बराक ओबामा’ का भारत दौरा ..बदलते समय के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की मजबूत होती छवि का परिचायक है …और अगले तीन दिन इस दिशा में अत्यंत महत्पूर्ण होंगे ! मैं प्रारम्भ से ही आदरणीय प्रधानमंत्री जी के विदेश नीति का कायल रहा हूँ..! वास्तव में ‘मोदी सरकार’ ने विश्व की प्रमुख महाशक्तियों के साथ जिस तरह से नए सम्बन्ध स्थापित किये हैं…यह भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता हैं! विशेषकर ऐसी स्थिति में जब पूरा विश्व सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा हैं,..अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की रूप-रेखा बदल रही है…भारत का विकसित देशों के साथ मजबूत दोस्ताना सम्बन्ध ..नयी संभावनाओं को जन्म देने लगा हैं ! मुख्यरूप से ‘आतंकवाद’ के विरुद्ध जिस साझा लड़ाई की लम्बे समय से आवश्यकता महसूस की जाती रही है..आज उस दिशा में भी सकारात्मक परिवर्तन के आसार बढ़ने लगे है! कहीं न कहीं आज अमेरिका सहित विश्व की सभी महाशक्तियां ‘आतंकवाद’ के सबंध में भारतीय चिंताओं का समर्थन कर रही हैं…और उन्हें भी लगने लगा है कि आतंकवाद के विरुद्ध एक अंतर्राष्ट्रीय मोर्चाबंदी की आवश्यकता है! अमेरिकी राष्ट्रपति का त्रिदिवसीय भारत दौरा निश्चय ही भारत-अमेरिका सबंधों में अभूतपूर्व सफलता की कड़ी साबित होगा और आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय प्रतिबद्धताओं को एक नयी ऊर्जा प्राप्त होगी!
वस्तुतः जब हम इतिहास के पन्नों पर भारत-अमेरिका संबंधों पर नजर डालें तो बड़े उत्तर-चढाव वाले रिश्ते रहें है! जब विश्व दो बड़ी महाशक्तियों के प्रभाव में गोलबंद था, भारत के ‘सोवियत संघ’ के साथ मधुर सम्बन्ध भारत-अमेरिका संबंधों में कटुता का कारन बने रहे! समय के साथ अंतर्राष्ट्रीय संतुलन बदलने लगा और सोवियत संघ का विघटन हो गया, जिससे अमेरिका का प्रभुत्व बढ़ता चला गया ! इस बीच भारत के मजबूत सम्बंध रूस के साथ बने रहे..लेकिन भारत-अमेरिका संबंधों में कोई नयी पहल होती नहीं दिख रही थी! समय के साथ देश में सरकारें बदलीं, नए लोगों के हाथों में सत्ता का सञ्चालन आया..और विदेश नीति के मायने भी बदलने लगे ..और इसका प्रभाव हुआ की भारत-अमेरिका के स्थिर संबंधों में गर्मजोशी आने लगी ! यही कारण है पिछले दो दशक में भारत-अमेरिका के संबन्ध लगातार मजबूत हुए हैं ! भारत के आर्थिक उदारीकरण की नीतियों से प्रमुख अमेरिकी कंपनियों को भारत में व्यवसाय के लिए ‘बड़ा बाजार’ मिल गए, वहीँ वीज़ा नियमों में सुधर से आम लोगों के लिए अमेरिका का दरवाजा खुलने लगा ! संबंधों के महत्वा को समझते हुए दोनों-देशों के तरफ से सामरिक प्रयास होने लगे ! इन संबंधों को अटल सरकार ने एक नयी ऊंचाई दी..वहीँ ‘मनमोहन सरकार’ ने भी वैश्विक मंच पर अमेरिकी संबंधों के महत्व को हमेशा वरीयता दी! हालाँकि पिछले वर्ष एक-दो ऐसे वाकये हुए..जहाँ संबंधों में थोड़ी कटुता का अनुभव किया गया …लेकिन जिस तरह मोदी सरकार ने इस दिशा में मजबूत और सफल पहल की है, ‘भारत-अमेरिका’ संबंधों में ‘सम्पूर्णता’ का भाव आने लगा है! कुछ ही समय में अपने आपको विश्व के बड़े और प्रभावशाली नेताओं में शुमार कर चुके ‘श्री नरेंद्र मोदी’ का ‘बराक ओबामा’ के साथ मित्रवत सम्बन्ध …इक्कीसवीं सदी में दो बड़े देशों के आंतरिक, व्यापारिक, सामाजिक और कूटनीतिक रिश्तें में एक अद्भुत और अभूतपूर्व अध्याय साबित होगा ! मुख्यरूप से पडोसी पाकिस्तान के साथ हमारे संबधों और आतंकवाद के विरुद्ध हमारी प्रतिबद्धताओं पर ‘अमेरिका’ का सहयोगी रुख ..दक्षिण पूर्व एशिया में शांति की संभावनाओं को मजबूती प्रदान करता हैं! हालाँकि भारत ने जब भी मौका मिला है.. अमेरिका सहित सम्पूर्ण विश्व को ‘ पाकिस्तान समर्थित आंतकवाद’ के गंभीर परिणामों से सचेत किया है..लेकिन अमेरिका की नीति अब तक ‘घाव’ सहलाने वाली ही रही है! पेंटागन पर आतंकवादी हमले के बाद जो आक्रामक रुख अमेरिका का दिखा.. वैसा रुख पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरुद्ध कभी नहीं रहा हैं! लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से ‘आतंकवाद’ तेजी से विकराल रूप धारण कर मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बना है…कहीं न कहीं भारतीय चिंताओं को लेकर वैश्विक महाशक्तियों की सोच में बड़ा बदलाव आया है और अमेरिका सोचने पर मजबूर हुआ है कि ‘पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद’ का खत्म किये बिना वैश्विक शांति की स्थापना संभव नहीं है!
आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत दौरे पर है..निश्चय ही पडोसी देश की नजरें ..रिश्तें की गर्माहट को देख बार-बार बेचैन होंगी ! नवाज साहब की नींदें हराम हो जाएँगी..लेकिन देखना महत्पूर्ण होगा की इस दौरे में भारत-अमेरिकी की बढ़ती नजदीकियों से पाकिस्तान की हरकतें कितनी सुधरती है? क्या पाकिस्तान समय की चाल को समझ पायेगा ? सीमापार से लगातर आ रहीं गोलीबारी की खबरें ..क्या बदलेंगी?

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