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मुलायम का परिवार में कराया गया सीज फायर कारगर नहीं

Posted On: 2 Oct, 2016 Others में

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kpsinghorai

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सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह द्वारा परिवार में कराया गया सीज फायर कारगर साबित नहीं हो रहा है। चचा-भतीजे में जवाबी कारवाईयों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। कुछ दिनों ठण्डे रहने के बाद चचा की गरमी शांत न होते देख मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी दुबारा अपने धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने का आभास नए मंत्रियों के विभाग वितरण में करा दिया है। इस बीच मुलायम सिंह यादव द्वारा अपनाई गई तटस्थ मुद्रा को कम रहस्यमय नहीं माना जा रहा है।
मुलायम सिंह ने चचा भतीजे की जंग खुलेआम शुरू होने के बाद लखनऊ में आकर वीटो पावर का इस्तेमाल किया, तो अखिलेश यादव के फौलादी इरादे पलक झपकते ही मोम हो गए। उनकी दंडवत् मुद्रा के बाद उम्मीद यह की गई थी कि पारिवारिक रसूख की मान्यता बनाए रखने के लिए शिवपाल सिंह यादव भी अब प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में अखिलेश के साथ सामंजस्य बनाकर चलने की नीति अख्तियार करेंगे। लेकिन शिवपाल सिंह ने बागी फौज के दमन की कारवाइयां शुरू करके इस अंदाजे को झुठला डाला। अखिलेश की सरपरस्ती करने की वजह से उन्हें अपनी निगाह में प्रोफेसर राम गोपाल यादव बुरी तरह खटक रहे थे। लेकिन राम गोपाल पर सीधा निशाना साधा नहीं जा सकता था। सो उन्होंने उनके भांजे अरविन्द यादव को पार्टी से निकालने की घोषणा कर डाली, साथ ही अखिलेश की कोटरी के विधायक सांसद और पदाधिकारी भी नाप दिए। शिवपाल को इंतजार था कि इस उकसावे के बाद राम गोपाल कुछ ऐसा कर बैठें जिससे उन पर सीधे एक्शन का रास्ता साफ हो जाए, तो राम गोपाल नेताजी का मुंह देख रहे थे कि वे शिवपाल के जुल्म का प्रतिवाद करें, ताकि पार्टी में इकतरफा चलाने के उनके मंसूबों पर विराम लग सके। लेकिन मुलायम सिंह इकदम तटस्थ हो गए। आखिर में राम गोपाल सैकड़ों गाड़ियों का काफिला सजाकर नौयडा से इटावा तक पहुंचे और इस शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ नेताजी के प्रति अदब मर्यादा बनाए रखते हुए उन्होंने शिवपाल को आगाह भी किया।
फिर भी मुलायम सिंह की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालांकि किंकर्तव्यविमूढ़ अखिलेश में राम गोपाल के शक्ति प्रदर्शन से चेतना जागी और उन्होंने निष्कासित युवा नेताओं की वापसी के लिए खुला बयान जारी कर दिया। इसमें उनका लहजा कहीं से चुुनौती देने वाला नहीं था, लेकिन फिर भी शिवपाल को अखिलेश का राम गोपाल के सुर बोलना इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने निष्कासित नेताओं के पार्टी दफ्तर में घुसने तक के खिलाफ फरमान जारी कर दिया। लगता है कि अखिलेश को इसके बाद महसूस हुआ है कि अपने राजनैतिक अस्तित्व को बचाने के लिए उन्हें पिता से किए गए वायदे को कुछ सीमा तक भुलाना पड़ेगा। इसी बदले की कार्रवाई का नतीजा है मंत्रियों के विभाग वितरण में शिवपाल के दो और मलाईदार विभागों का कम किया जाना। इसी के साथ उन्होंने अपने पिता के दुलारे गायत्री प्रसाद प्रजापति को खनन विभाग लौटाना भी गंवारा नहीं किया। यह दूसरी बात है कि उन्हें दिया गया परिवहन विभाग भी कम मलाईदार नहीं है। गौरतलब यह भी है कि अखिलेश पितृ प़क्ष के कारण मंत्रिमण्डल विस्तार को टाल रहे थे, लेकिन मुलायम सिंह को यह एहसास कराया गया कि अखिलेश गायत्री, मनोज पाण्डेय, शिवाकांत ओझा आदि की वापसी के उनके फैसले में टालमटोल के लिए बहाना कर रहे हैं। इसलिए उनके सख्त हो जाने पर पितृ पक्ष में ही उनके चहेतों की शपथ तो अखिलेश ने करा दी थी। लेकिन विभाग वितरण रोक दिया था। इस बीच जरूरत से ज्यादा मुखर राज्यपाल राम नाइक ने भी नए मंत्रियों के विभाग वितरण में हो रही देरी पर टिप्पणी कर दी। इस कारण नवरात्र के पहले ही दिन अखिलेश ने इस कार्य को संपन्न कर देने में ही गनीमत समझी।

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