blogid : 8844 postid : 58

मैं दोषी नहीं था

Posted On: 29 Oct, 2012 Others में

बोल कि लब आजाद हैं...jagran

krishnakant

19 Posts

61 Comments

पहली बार जब मैं जेल गया
मेरे हाथों में
एक खिलौने का डब्बा था
उसमें कुछ कंचे थे
गली में पड़ा मिला
एक जंग खाया चाकू था
कुछ बिजली के फ्यूज हुए तार थे
और तब मैं यह भी नहीं जानता था
कि आतंकवादी होने का मतलब क्या होता है

दूसरी बार जब जेल गया
तो मैं कुछ बड़ा हो गया था
और एक अजीज दोस्त से
बतिया रहा था
एक नक्सली की पुलिसिया हत्या के बाद
अखबार में छपी खबर और तस्वीर के बारे में
तब मैं नहीं जानता था नक्सली होने का मतलब
और यह भी नहीं कि नक्सली शब्द उचारना,
जबान पर लाना कोई जुर्म है

तीसरी बार जब जेल गया
तब मैने बिल्कुल नहीं जाना
कि मैं जेल क्यों गया
इतना मालूम चला था अखबारों से
कि उनका प्रचार कामयाब हुआ
और पूरा देश घृणा करने लगा है मुझसे

हालांकि, जेल में मिलने आती
अपनी नन्ही बच्ची की आंखों में
मैं देख लिया करता था अपना चेहरा
उसकी आंखें बोलती थीं
मैं दोषी नहीं था

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (9 votes, average: 4.44 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग