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तो ऐसे मे हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

Posted On: 15 Jun, 2017 Others में

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Sushil Pandey

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हमारी अगली पीढ़ी को सम्हालने की और उन्हे सही मार्ग प्रशस्त करने की जिम्मेदारी भी हमारे ही कन्धो पर है और हमे ये किसी भी हालत मे करना होगा।

वरना हमारे बच्चे भी ” कैसे न मिलेगी आजादी, हम ले के रहेंगे आजादी ” जैसे नारे लगाते हुए किसी दिन कीसी भारतीय सैनिक के गोली के शिकार हो जायेंगे और ऐसों को हो भी जाना चाहिए।
इन मासूमों को सही और गलत मे फर्क करना हमे ही सिखाना होगा।

हमे बताना होगा उन्हे कि देश का दर्जा अपनी माँ से भी उपर है, वो नादान हैं उनको कमजोरों को न दबाना, सिखाना भी हमारी ही जिम्मेदारी है।

उन्हे अच्छे विद्यालय और विश्वविद्यालयों मे भर्ती कराकर हम अपनी जिम्मेदारीयों से मुंह नही मोड़ सकते। हमे इंसानियत और रिश्तेदारीयों का कद्र करना भी बताना होगा उन्हे।

उन्हे जीत पर खुश होने के साथ-साथ हारने पर दुखी होकर बेइंतहा रोने का पाठ भी हमे ही पढ़ाना होगा।

गंगाजल को अमृत सा, देश की मिट्टी को चंदन सा और तिरंगे के लिए जान तक की बाजी लगा देने जैसा स्वभाव भी हमे ही बैठाना होगा उनके कोमल हृदय मे।

ये सारी बाते किताबों मे नही पढ़ाई जाती हमे ये सब दादी और नानी की कहानियों से सिखाया गया है जो अब नही सुनायी जाती, तो ऐसे मे हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

अगर हम ऐसा कर पाए तो यकीन मानिए हमारी अगली पीढ़ी ये पंक्तिया गुनगुनाती हुई मिलेंगी कि….

मै भारत वर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ,
यहां की चंदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ।
मुझे चिंता नही है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
बस तिरंगा हो कफन मेरा यही अरमान करता हूँ।

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