blogid : 3358 postid : 1388814

विवाहेतर सम्बन्ध और गिरफ़्तारी

Posted On: 24 Nov, 2018 में

मुद्दे की बात, कुमारेन्द्र के साथ

डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

548 Posts

1118 Comments

पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने क्रांतिकारी निर्णय देते हुए दो धाराओं की दिशा बदल दी. एक से समलैंगिक सम्बन्ध बनाने वालों को राहत मिली और दूसरी धारा से विवाहेतर सम्बन्ध बनाने वालों को. अदालत द्वारा धारा 370 और धारा 497 की दिशा बदली गई उसके बाद समाज की दिशा बदले या न बदले मगर कानून की, पुलिस की दिशा अवश्य बदलनी चाहिए. यहाँ चर्चा इन निर्णयों के बाद भी सामने आने वाली कुछ खबरों के सन्दर्भ में है, जिसमें हाल-फिलहाल धारा 497 को शामिल किया गया है. लगभग दो माह होने को आये हैं जबकि विवाहेतर संबंधों के बनाये जाने को कानूनी मान्यता मिलने के बाद भी कई घटनाएँ सामने आईं हैं जहाँ कि दो बालिग स्त्री-पुरुष के द्वारा आपसी सहमति से सम्बन्ध बनाये जाने के बाद भी उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया. अदालत द्वारा जबकि इस सम्बन्ध में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यह कानून एक तरह से महिलाओं के साथ भेदभाव करता है. उसका ऐसा कहना किसी और सन्दर्भ में हो सकता है मगर जबकि कानूनी रूप से स्त्री और पुरुष दोनों को आपसी सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की छूट मिल गई है तब ऐसा करने वालों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करना क्या अदालत के आदेश का अपमान नहीं?

लेखक कानून का जानकार नहीं, इसलिए ऐसा सवाल दिमाग में आना स्वाभाविक है. ऐसा सवाल इसलिए भी जेहन में उपजा क्योंकि किसी शिकायत पर पुलिस प्रशासन का किसी के घर पहुँच कर, किसी होटल पहुँच कर छापामारी करने, बालिग स्त्री-पुरुष को गिरफ्तार करने की खबरें नियमित रूप से सुनाई पड़ रही हैं. सवाल यह भी उपजता है कि यदि कोई बालिग स्त्री-पुरुष आपसी सहमति से अपने घर में, किसी होटल में शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं और इसके प्रमाण मिलते हैं कि उनके द्वारा किसी रूप में वेश्यावृत्ति नहीं की जा रही है, होटल प्रबंधक, मालिक द्वारा किसी तरह से वेश्यावृत्ति की संलिप्तता नहीं है तो फिर ऐसे बालिग स्त्री-पुरुष को गिरफ्तार क्यों किया जाता है? यह भी एक तथ्य है कि वे दोनों किसी सार्वजनिक स्थान पर शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना रहे होते हैं तब क्या उनको गिरफ्तार किया जा सकता है? यदि आपसी सहमति से सम्बन्ध बनाना अब गैर-कानूनी नहीं तो फिर क्या इस सम्बन्ध में पुलिस प्रशासन को सचेत नहीं किया गया है? जबकि यह सर्वविदित है कि कानून का पालन करवाना पुलिस का ही काम है.

इस विषय पर इसलिए भी चर्चा आवश्यक है क्योंकि ऐसे ही बहुत सारे विषय हैं जिनके कारण समाज में विसंगति देखने को मिलती है. ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिनको लेकर कानून कुछ कहता है और पुलिस प्रशासन कुछ और करता है. इस तरह का दोहरा व्यवहार, बर्ताव भी समाज में न्यायालय की उस सोच को बाधित करता है, जिसके द्वारा उसके द्वारा हाल ही में दो-दो धाराओं की दिशा बदली गई.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग