blogid : 16143 postid : 623197

प्रेम के दो मुक्तक

Posted On: 9 Oct, 2013 Others में

chintanKuchh Apani Kahe, Kuchh Unaki Sune

Lalit Narayan Mishra

18 Posts

35 Comments

–१–

राग-रागिनी से सज्जित, उनकी धुन पर बजते हर साज/
नीला अम्बर हर्षित होकर, पुहुप वृष्टि करता है आज//
मणि-माणिक्य रत्न सब लेकर, धवल चांदनी है आई/
तिमिर छटा मेरे जीवन से, जबसे उनकी संगती पायी//
वाणी ऐसी मनमोहक, झंकृत कर देती मन के तार/
रीतिबद्ध कविता है वो, कहता मेरा मन बारम्बार//

—२—

सुरभित वातावरण हो उठा, बस एक तेरे आने के बाद|
मधुकर गूंज उठे उपवन में, तेरी एक झलक पाने के बाद|
नंदन वन का खिला कुसुम, या इंद्र सभा का है कोई|
त्रिवेणी भी जाग उठी, जो अब तक थी यूँ ही सोई |
पारस हो तुम ऐ प्राण-प्रिये, पर कैसे तुमको बतलाये|
पत्थर को भी यदि छू दो तुम, तो वो भी सोना हो जाए||||

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग