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प्रेम संबंधों में भी ताकत का बोलबाला !!

Posted On: 4 Jun, 2011 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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प्रेम संबंधों (Love Relationship) में हमेशा से ही पुरुषों का वर्चस्व माना गया है. एक आदर्श प्रेम कहानी (Love story) में पुरुष के द्वारा ही पहल की जाती है. किसी महिला के समक्ष प्रस्ताव(Proposal) रखना हो या फिर बेवफाई (Deceive) ही क्यों न करनी हो, पुरुष हमेशा से ही आगे रहे हैं. मौलिक रूप से प्रेम संबंध पुरुष प्रधान (Male oriented) ही माने और समझे गए हैं. महिलाओं को तो फिल्में (Films), किस्से-कहानी आदि में अबला और असहाय (Helpless) ही दर्शाया गया है.


लेकिन क्या वास्तव में ऐसा ही है?


couple having argumentहाल ही में हुए एक अध्ययन (Study) ने इस बात को गलत साबित कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक महिला या पुरुष नहीं, बल्कि वैयक्तिक क्षमता (Individual Ability) या ताकत किसी प्रेम प्रसंग (Love Affairs) में अहम भूमिका (Role) अदा करती है. फिर यह क्षमता आर्थिक तौर (Financially) पर हो या मानसिक तौर (Mentally) पर, जो ज्यादा मजबूत होता है, उसी की ही प्रधानता (Domination) रहती है. सर्वेक्षण (Research) द्वारा यह बात भी सामने आई है कि उच्च पदों पर आसीन लोगो के बेवफा होने की संभावना  अधिक रहती है और यहां इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि धोखा देने वाला व्यक्ति महिला है या पुरुष.  कहा जा सकता है कि महिलाएं भी अपनी स्वार्थपूर्ति (Self interest) के लिए धोखा देने में पीछे नहीं हैं.


बदलती जीवनशैली (Lifestyle) के परिणामस्वरूप लोगों की प्राथमिकताओं (Priorities) में भी परिवर्तन आने लगा है. व्यक्तिगत संबंधों की अहमियत लगभग खो सी गई है, इसका स्थान अब प्रभावशाली व्यक्तित्व (Personality) और बेजोड़ आर्थिक पृष्ठभूमि (Financial Background) ने हथिया लिया है. लोग अब संबंधों के महत्व को भूल अपनी आर्थिक तरक्की की तरफ ज्यादा रुझान लेने लगे हैं, जिसका खामियाज़ा भावनात्मक रूप (Emotionally) से दोनों को, खासकर उसे भुगतना पड़ता हैं जो संबंध के प्रति अधिक गंभीर रहता है.


वैसे तो इस अध्ययन से पहले भी इससे संबंधित कई शोध (Study) हुए हैं, लेकिन किसी भी शोध का आधार महिलाओं को नहीं बनाया गया था, जिससे पता चले कि शक्तिशाली महिला (Powerful Female) भी धोखा दे सकती है.



इस रिपोर्ट के बाद शायद यह भ्रांति (Miss understanding) तो समाप्त हो ही जाएगी कि धोखा देना और बेवफाई करने का जिम्मा केवल पुरुषों का ही है और महिलाएं तो बस पुरुषों द्वारा किए अत्याचार (Torture) को सहन करती रहती हैं.

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