blogid : 313 postid : 2924

घंटों भूखे-प्यासे रह सकते हैं फेसबुक यूजर्स !!

Posted On: 17 May, 2012 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

Lifestyle Blog

894 Posts

831 Comments

सोशल नेटवर्किंग साइट पर दोस्तों से गपशप करना, अपनी तस्वीरें और विचार उनके साथ बांटना आजकल के युवाओं को खूब भाता है. जब आपकी तस्वीरों के लिए आपके दोस्त लाइक का बटन दबाते हैं या आपके स्टेटस पर बहुत सारे कमेंट्स करते हैं, आपसे बात करने के लिए आपका इंतजार करते हैं तो निश्चय ही आपकी खुशी दोगुनी हो जाती है.


facebookलेकिन आपकी यह खुशी कितनी होती है यह बात अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अपने एक सर्वेक्षण के बाद सार्वजनिक की है. अगर हम वैज्ञानिकों की स्थापनाओं को हकीकत मानें तो फेसबुक का प्रयोग करने वाले लोगों को उतनी ही खुशी मिलती है जितनी किसी भूखे व्यक्ति को खाने और शारीरिक संबंध बनाने से मिलती है.


हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा संपन्न इस सर्वेक्षण में यह प्रमाणित हुआ है कि फेसबुक उपयोगकर्ता जब अपने दोस्तों के सामने अपनी उपलब्धियां गिनाने लगते हैं तो उन्हें ना तो अपने समय का ध्यान रहता है और ना ही अपने पैसों की परवाह होती है. इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता और विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट के मुताबिक, फेसबुक जैसी ऑनलाइन सोशल नेटवर्क साइट्स के जरिए व्यक्ति खुद को बूस्ट करता है और अपने उत्साह को एक आयाम देता है.

स्मार्ट दिखने का नया फंडा


हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कुछ स्वयंसेवकों के मस्तिष्क में चलने वाली गतिविधियों को जानने के लिए एमआरआई स्कैनर की सहायता लेकर एक टेस्ट किया जिसमें सबसे पहले प्रतिभागियों के विचारों और अनुभूतियों के बारे में बात की उसके बाद उनसे अन्य प्रश्न पूछे गए.



इस अध्ययन के दौरान यह देखा गया कि जब लोग अपने बारे में बात कर रहे होते हैं तो उनके मस्तिष्क का मेसोलिम्बिक डोपामाइन सिस्टम काफी अधिक गतिशील हो जाता है. मेसोलिम्बिक डोपामाइन मस्तिष्क का वही हिस्सा है जो खाने, संबंध स्थापित करने, पैसा जीतने और अच्छा खाना खाने पर संतुष्टि महसूस करवाता है. अर्थात जब व्यक्ति किसी को अपने बारे में बता रहा होता है या अपनी उपलब्धियां गिनवा रहा होता है तो वह पूरे जोश और उत्साह के साथ ऐसा करता है. उसे अपने बारे में बात करना बहुत पसंद होता है और जब उसे यह अवसर मिलता है तो वह बेहद सुकून महसूस करता है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि सामान्य व्यक्ति अपनी कमाई का 17 से 25 प्रतिशत हिस्सा खुद को भावनात्मक रूप से संतुष्ट करने में खर्च करते हैं.


उपरोक्त अध्ययन को अगर हम भारतीय परिदृश्य के अनुसार देखें तो यहां भी फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों की लोकप्रियता आसमान छूने लगी है. प्राय: सभी को अपने ऑनलाइन दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद होता है. कुछ तो अपना सारा दिन फेसबुक के सहारे ही व्यतीत कर देते हैं. वहीं दूसरी ओर ऐसे भी कुछ लोग हैं, जिन्हें असल दुनियां में जीना पसंद है, जो अभी भी फेसबुक की आदत से काफी दूर हैं. वह आभासी दुनियां से अधिक असल दुनियां में विश्वास करते हैं. ऐसे हालातों में यह कहना गलत नहीं होगा कि फेसबुक उपयोग करना किस व्यक्ति को कितनी खुशी देता है यह उसकी अपनी प्राथमिकताओं और इच्छाओं पर भी निर्भर करता है. इन स्थापनाओं को सभी पर समान रूप से लागू करना न्यासंगत नहीं होगा.


महिलाओं द्वारा पुरुषों पर किए जाने वाले मुख्य दस अत्याचार


Read Hindi News


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग