blogid : 313 postid : 583311

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप शादीशुदा हैं या कुंवारी

Posted On: 22 Aug, 2013 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

Lifestyle Blog

894 Posts

831 Comments

वैसे तो हम अत्याधुनिक और बेहद खुले विचारों वाले 21वीं सदी के माहौल में जी रहे हैं, जहां लड़का-लड़की के बीच दोस्ती होना, उन दोनों का प्रेम संबंध होना, साथ घूमना-फिरना कुछ हद तक स्वीकार किया जा चुका है। लेकिन एक सवाल ऐसा है जो आज भी हमें उतना ही परेशान करता था, उतना ही प्रासंगिक माना जाता है जितना कभी पहले माना जाता था। वो सवाल है कि क्या लड़का और लड़की कभी दोस्त हो सकते हैं?

सगाई के बाद ‘अंगूठी’ पहनने के फायदे


बहुत से लोग इस सवाल का जवाब हां में देंगे लेकिन हम आपको जिस हकीकत से रुबरू करवाने जा रहे हैं वह थोड़ी कड़वी जरूर है लेकिन अब सच चाहे कितना ही कड़वा क्यों ना हो सच तो सच होता है।


हाल ही में हुए एक अध्ययन की मानें तो  लड़का कभी किसी लड़की का दोस्त बनकर नहीं रह सकता,कही ना कहीं उन दोनों के बीच प्यार जरूर आ जाता है और इसे लाने वाला होता है पुरुष।

ब्रेस्ट कैंसर के निशाने पर हैं कामकाजी औरतें !!


लंदन में हुए इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सेक्स की तरफ ज्यादा आकर्षित होने से कहीं ना कहीं पुरुष अपनी फीमेल फ्रेंड की तरफ भी कुछ इसी तरह दिलचस्पी लेने लगता है और जैसा की हम सभी जानते हैं कि जहां शारीरिक दिलचस्पी लेने का सिलसिला शुरु हो जाता है वहां दोस्ती पीछे छूट जाती है।


इस सर्वे में 88 जोड़ों को शामिल किया गया जिसमें उन्हें एक दूसरे की तरह शारीरिक तौर पर आकर्षित होने से जुड़े नंबर देने के लिए कहा गया. एक गुप्त प्रश्नपत्र के जरिए सभी को अपने नंबर देने के लिए कहा गया और जब इस परिक्षण के नतीजे देखे गए तो हैरानी इस बात की थी कि ज्यादातर पुरुष अपनी फीमेल फ्रेंड के प्रति ही आकर्षित थे और उन्हें इस बात से भी कोई अंतर नहीं पड़ता कि उनकी दोस्त शादीशुदा है या फिर सिंगल. हालांकि महिलाएं भी शादीशुदा होने के बावजूद अपने पुरुष मित्र के प्रति आकर्षित रहती हैं लेकिन वह इस आकर्षण को अपनी शादीशुदा जिन्दगी को बचाने के लिए नजरअंदाज कर देती हैं।


आशय यह है कि जहां महिलाओं के लिए दोस्त के प्रति शारीरिक आकर्षण से ज्यादा अपने विवाहित जीवन को महत्व देती हैं, वहीं पुरुष अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं को विवाहित जीवन से अलग रखकर चलते हैं.


उपरोक्त अध्ययन को अगर भारतीय परिदृश्य के अनुसार देखा जाए तो एक बात जो स्पष्ट तौर पर प्रमाणित होती है वो यह कि मनुष्य होने के नाते पारस्परिक शारीरिक आकर्षण की संभावना महिला-पुरुष में समान रहती है लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि वह अपनी प्राथमिकताओं में किसे रखते हैं.

‘लेडीज’ झूठ क्यों बोलती हैं

डेटिंग करनी है फ्रेंडशिप नहीं


Web Title: Girl and boy cant be friends forever


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग