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चेहरा बताएगा कि कितने वफादार हैं आप !!

Posted On: 29 Jul, 2011 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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facial studiesआमतौर पर पुरुषों के विषय में यह माना जाता है कि वह अपने साथी के प्रति पूर्ण वफादार नहीं होते बल्कि जरूरत और समय के हिसाब से वह अपनी प्राथमिकताएं बदलते रहते हैं. जहां महिलाएं संबंध में आते ही अपने साथी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाती हैं, वहीं पुरुष शारीरिक आकर्षण को अत्याधिक महत्व देते हैं. महिलाओं की अपेक्षा उनकी धोखा देने की प्रवृत्ति तीव्र होती है.


अगर आपको हर समय यही डर सताता रहता है कि कहीं आपका साथी आपकी भावनाओं के साथ कोई खिलवाड़ ना करे या वह आपके पीठ-पीछे आपको धोखा ना दे रहा हो तो हाल ही में हुआ एक शोध आपकी इस चिंता को थोड़ा कम कर सकता है. साथ ही आपको इस काबिल बना सकता है कि आप पहली ही नजर में अपने साथी की वफादारी का पता लगा लें.


एक ब्रिटिश संस्थान द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे पुरुष जिनका चेहरा चौड़ा और बड़ा होता है वह अपने साथी के प्रति समर्पित नहीं होते, समय पड़ने पर वह आसानी से धोखा दे सकते हैं. दूसरी ओर वह पुरुष जिनका चेहरा पतला और कम चौड़ा होता है वह रिश्तों के प्रति गंभीर और ईमानदार होते हैं. अपने इस शोध की सार्थकता सिद्ध करने के लिए शोधकर्ताओं ने कई ऐसे बड़े नामों का जिक्र किया हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी को धोखा दिया है, जिनमें से अधिकतर का चेहरा चौड़ा है.


पुरुषों के इस स्वभाव के बारे में शोधकर्ताओं का मानना है कि चौड़े चेहरे वाले पुरुष अपेक्षाकृत ज्यादा आत्मकेंद्रित और अपनी ताकत पर घमंड करने वाले होते हैं. इसी कारण वह किसी दूसरे की भावनाओं को महत्व देना कम कर देते हैं. वे वही करना पसंद करते हैं जो उनका मन करे, चाहे फिर अपने साथी को धोखा दें या किसी दूसरे के प्रति अशिष्ट व्यवहार करें. वह अपने किसी भी व्यवहार को गलत नहीं समझते और मनचाहे ढंग से उसका अनुसरण भी करते हैं.


लेकिन क्या विदेशों के द्वारा कराए जा रहे शोध और इनके तथाकथित नतीजे विश्वसनीय हैं भी या विदेशी लोगों की भ्रामक परिकल्पना का ही उदाहरण हैं?


क्योंकि ऐसे शोध केवल एक विशिष्ट क्षेत्र के लोगों को ही केन्द्र में रखकर किए जाते हैं, इसीलिए इन्हें प्रमाणित मानना थोड़ा मुश्किल होता है. यह सर्वेक्षण एक निश्चित समूह के लोगों पर कुछ समय के लिए किए गए अध्ययन का ही परिणाम होते हैं जिनके नतीजे समान रूप से सभी मनुष्य़ों पर लागू नहीं किए जा सकते हैं. निश्चित ही ऐसे भ्रामक और प्रचलित सर्वेक्षण मनुष्यों के भीतर उधेड़बुन की परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं.


ऐसे शोध कई तरह से सामान्य जनमानस पर प्रभाव डाल सकते हैं. आम लोग इन शोधों से प्रेरित हो जाते हैं. वह संभवत: अपने दोस्तों और साथी का चुनाव करने से पहले उनके चेहरे को देखेंगे कि वह चौड़ा है या पतला. एक हद तक तो मनुष्य का यह व्यवहार हास्यास्पद समझ कर वहन किया जा सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इस ओर ध्यान देना गंभीर परिणाम भी पैदा कर सकता है. क्योंकि इन सर्वेक्षणों के नतीजों का अत्याधिक प्रचलन मनुष्य की भावनाओं को चोट पहुंचा सकता है. उनके बीच के प्रेम और लगाव को भी कम कर सकता है. चेहरे का आकार ही किसी रिश्ते की स्थिरता बन कर रह जाए तो स्थिति चिंतनीय बन सकती है. यद्यपि मनुष्य की आकृति को देखकर उसके स्वभाव के बारे में संभावना लगाने का शास्त्र भारत में समुद्र शास्त्र के रूप में विख्यात है लेकिन उसके प्रयोगों का क्षेत्र बहुत विस्तृत है और साथ ही वह सभी मनुष्यों पर समान रूप से लागू होता है. क्योंकि वह कुछ समय का नहीं बल्कि सैकड़ों वर्षों के अध्ययन का परिणाम है.


एक जागरुक व्यक्ति को चाहिए कि वह ऐसे शोधों को केवल अपने मनोरंजन का ही साधन समझे, ना कि उन्हें गंभीरता से लेकर हर किसी को शंका की दृष्टि से देखे.


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