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कैसे बनाएं एक स्वस्थ रोमांटिक रिश्ता

Posted On: 10 Aug, 2010 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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wedding_ringएक स्वस्थ रिश्ते को बनाए रखना बहुत ही कठिन काम है लेकिन एक कहावत है अगर आप किसी चीज़ का अभ्यास करते हैं तो रास्ते अपने आप ही खुलने लगते हैं. अपने प्यार के साथ रोमांटिक और स्वस्थ रिश्ता बनाये रखने के लिए शायद यह अभ्यास ही आपका उद्धार करेगा.


ग्रीनविच हॉस्पिटल सेंटर के मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक डॉ. मार्क बीटल का कहना है कि अगर आप और आपके साथी के बीच कुछ समय से मनमुटाव चल रहा है तो उसे खत्म करने के लिए ज़रुरी है कि आप ऐसी स्थिति से बचें जिनके द्वारा यह मनमुटाव उत्पन्न होते हैं.


डॉ. बीटल के अनुसार “समय के साथ प्यार में कुछ ऐसी शर्तें बन जाती हैं जो आप दोनों के दरमियाँ हमेशा रहती हैं. “नकरात्मक सोच आपके रिश्ते के बीच दरार पैदा करती है जिससे आप दोनों के बीच प्यार कम होता है. लोग अक्सर ऐसी स्थिति पर आकर अटक जाते हैं क्योंकि उनके द्वारा बुनी गई स्थिति के बारे में वह जागरूक नहीं होते.


प्यार की चाहत


हम सभी को प्यार चाहिए. प्यार शब्द का पहला एहसास मन प्रफुल्लित कर देता है आप में नयी चेतना का संचार करता है. डॉ. बीटल के अनुसार प्यार के अनुभव के दौरान हमारे मस्तिष्क में से ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन नामक रसायन निकलते हैं जो आपको खुशी का अनुभव कराते हैं.


अगर आप एक स्वस्थ और सुखी जीवन जीना चाहते हैं तो, इसके लिए ज़रुरी है कि आप अपने आपकी सबसे बेहतर देखभाल करें.


अगर आपको अपने अंदर प्यार करने की क्षमता को बढ़ाना है तो सबसे पहले आपको अपना जैवकीय संतुलित करना होता है. डॉ. बीटल बताते हैं कि मानसिक रोग से घर्षित रोगियों को प्रोत्साहन के साथ-साथ व्यायाम और उचित पोषण युक्त आहार ग्रहण करने की सलाह भी देता हूं.


relationship_20अगर आप अपने आपको अपने साथी के सामने सही तरीके से प्रस्तुत करते हैं तो आप दोनों में प्यार बढेगा. आप जिसे चाहते हैं और उसे जिस रूप में देखना चाहते हैं इसके लिए आपको अपने मस्तिष्क में वैसे ही विचारों का प्रवाह करना चाहिए.


अधिकतर यह देखा गया है कि नकारात्मक अपेक्षाएं आपकी जागरूकता को कम करती है अतः यह ज़रुरी हो जाता है कि आप मस्तिष्क में उत्पन्न विचारों को अधिक अहमियत दें. दूसरों से मेलजोल बढ़ाने से आप दोनों के बीच किसी भी भ्रम की उत्पत्ति नहीं होती जिससे नकारात्मक अपेक्षाओं का अंत होता है.


मनोचिकित्सा के द्वारा आप बार-बार उत्पन्न हो रहे नकारात्मक अपेक्षाओं और विचारों को दोहराने से रोकते हैं जिससे प्यार बढ़ता है और जीवन में प्रेम का अनुभव सुखद खुशियाँ लाता है.

Source: mid-day.com

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