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इंटरनेट युग - खबरदार आदी ना बनें

Posted On: 5 Oct, 2010 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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अंतरजाल का नशा सेहत पर भारी


Hindi Lifestyle Blogsएक समय था जब मनुष्य जीवन में आउटडोर खेलों का खासा महत्व था. खासकर बच्चे दिन भर में कुछ घंटे तो खेलकूद में व्यतीत तो करते ही थे. परन्तु समय बदला अब क्रिकेट-फुटबॉल की जगह इंटरनेट गेमिंग ने ले ली है. एनएफ़एस और काउंटर स्ट्राइक बच्चों के पसंदीदा खेल हो गए हैं. टीवी देखने की जगह वह नेट सर्फिंग और चैटिंग करना अधिक पसंद करते हैं. युवाओं की जीवनशैली में इंटरनेट का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि वह औसतन चार से पाँच घंटे इंटरनेट का इस्तेमाल करने में व्यतीत करते हैं.


लेकिन क्या इंटरनेट का इतना इस्तेमाल करना युवाओं के लिए ठीक है? इस सवाल का उत्तर नहीं है क्योंकि एक शोध ने सिद्ध कर दिया है कि इंटरनेट पर ज्यादा समय ब्राउज़िंग करने से और वह भी खासकर युवाओं द्वारा उनके स्वास्थ्य जीवन पर भारी पड़ सकता है.


बीमारियों की जड़ है इंटरनेट


Hindi Blogsभारत के वाणिज्य एसोसिएटेड चैम्बर और उद्योग संगठन द्वारा साझा शोध में पाया गया है कि अगर युवा इंटरनेट का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं तो उनको विषाद, मोटापा तथा अनिद्रापन जैसे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है. इसके अलावा उनका समाज से कटाव हो जाता है जिससे उनके सामाजिक जीवन पर भी फ़र्क पड़ता है. और यह संभावना उनके ऊपर ज्यादा हो जाती है जिनके माँ-बाप कामकाजी होते हैं.


एसोचैम के सचिव डीएस रावत के मुताबिक जिस तेज़ी से इंटरनेट बच्चों और किशोरों तक पहुंचा है उससे अगर अच्छे कार्य हुए हैं तो उन अच्छे कार्यों के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं. उनके अनुसार आज बच्चे कम उम्र में ही ऑनलाइन दुनियां से परिचित हो रहे हैं. और जिन बच्चों के माता-पिता नौकरीपेशा हैं उनमें इंटरनेट का नशा ज्यादा देखने को मिलता है क्योंकि उन पर बड़े बुजुर्गों की निगरानी नहीं रहती. सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि लड़के, लड़कियों के मुकाबले इंटरनेट का प्रयोग ज़्यादा करते हैं.
अक्सर महानगरीय जीवन में यह देखा गया है कि जहाँ माँ-बाप दोनों नौकरीपेशा होते हैं वहाँ बच्चे या किशोर इंटरनेट पर अधिक समय देते हैं. इसके अलावा खेलने के लिए मैदानों और पार्कों की कमी भी एक वजह है.


लेकिन अगर इंटरनेट का प्रयोग खासकर युवाओं में कम नहीं किया गया तो इसके परिणाम काफ़ी गंभीर हो सकते हैं और जिसका युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

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