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गर्भावस्था से जुड़े ये भ्रम मात्र 'भ्रम' ही हैं

Posted On: 8 Aug, 2013 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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मां बनना बड़े सौभाग्य की बात कही जाती है. किसी को जीवन देना एक महान कार्य है और स्त्रियों को तो वैसे भी प्रकृति का यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि वह मां बनकर एक जीवन को इस धरती पर ला सकती है.  लेकिन हमारे समाज में गर्भावस्था से जुड़े कुछ ऐसे भ्रम विद्यमान है जो गर्भवति स्त्री के मन में विभिन्न शंकाएं पैदा कर देते हैं. इन मिथकों के पीछे कोई सत्य हो ना हो लेकिन चर्चित होने की वजह से इन्हें स्वत: स्वीकार कर लिया जाता है. हम आपको बताते हैं कि गर्भावस्था से जुड़े कौन-कौन से मिथक हमारे समाज में लोकप्रिय हैं और इनके पीछे की हकीकत क्या है:


भ्रम – गर्भावस्था में घी खाने से प्रसव के समय कम दर्द और परेशानियों का सामना करना पड़ता है.


हकीकत – घी और मक्खन एक अच्छे ल्यूब्रिकेंट्स माने जाते हैं लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि इनका सेवन प्रसव पीड़ा को कम कर सकता है. यह पेट साफ रखने में जरूर सहायक सिद्ध होते हैं.



भ्रम – गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से समय से पूर्व ही बच्चे के जन्म होने की स्थितियां पैदा हो जाती हैं.


हकीकत आम,खजूर और सूखे मेवों से भरी हुई भारतीय मिठाइयां गर्म तासीर वाली होती हैं लेकिन इनके सेवन से शायद ही गर्भपात या समय पूर्व प्रसव जैसी समस्याएं उत्पन्न हों. संतुलित मात्रा में इनका सेवन करने से कोई परेशानी नहीं होती.



भ्रम – गर्भावस्था में दो लोगों के हिसाब से भोजन करना चाहिए.


हकीकत – अगर गर्भावस्था के दौरान आप ज्यादा भोजन कर लेंगे तो सबसे पहले तो भोजन के बाद आपको परेशानी होगी और दूसरी ओर प्रसव के बाद बढ़े हुए वजन को कम करने में आपको काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. इसलिए बेहतर है कि आप पौष्टिक और संतुलित भोजन करें और वो भी मात्र 300 कैलोरी से अधिक वाला.



भ्रम – कुछ विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थ खाने से बच्चे का रंग गोरा होता है.


हकीकत – हमारे समाज में यह आम धारणा बन चुकी है कि अगर गर्भवती महिला दूध जैसी सफेद चीजों का सेवन अधिक करती है तो होने वाले बच्चा गोरा पैदा होता है. इसीलिए होने वाली मां को ऐसी चीजें खाने के लिए प्रेरित किया जाता है जिनका रंग सफेद होता है. लेकिन इस अवधारणा का परिणाम यह होता है कि भावी मां जरूरी पोषण से वंचित रह जाती है और एनीमिया जैसी भयंकर बीमारी की चपेट में आ जाती है. यह बात समझनी बहुत जरूरी है कि खाने का रंग बच्चे के रंग को प्रभावित नहीं करता बल्कि यह तो अनुवांशिक होता है.



भ्रम – गर्भावस्था के दौरान मसालेदार व्यंजन नहीं खाना चाहिए.


हकीकत – लोगों का ऐसा मानना है कि मसालेदार खाने समय से पूर्व प्रसव हो सकता है. लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है. हालांकि यह सही है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ चीजों को खाने से बचना चाहिए परंतु उनके पीछे कुछ तर्क हैं. उदाहरण के तौर पर पाश्चुराइज्ड किए बगैर चीज और दूध का सेवन काफी नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इनमें लिस्टीरिया नामक बैक्टीरिया पाया जाता है जो गर्भपात का कारण बन सकता है. इसके अलावा डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को शेलफिश, सूशी इत्यादि मछलियों के सेवन से दूर रहने की सलाह देते हैं क्योंकि यह कभी-कभी पेट खराब कर देती हैं और गर्भावस्था के दौरान अनावश्यक रूप से दवाइयां खाना मना होता है.



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