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विवाह के समय भी मिलती है नौकरी को प्राथमिकता!!

Posted On: 24 Jun, 2011 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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office peopleभारतीय समाज मूल रूप से परिवर्तनशील प्रकृति का रहा है और इसी के परिणामस्वरूप हमारे सामाजिक जीवन का कोई भी पहलू इस बदलाव से अछूता नहीं रह पाया है. खाने-पीने, कपड़े पहनने आदि छोटे-बड़े बदलावों के साथ ही हमारी परंपराओं और रीति-रिवाजों में भी महत्वपूर्ण अंतर आया है. विवाह को हमारे समाज में एक ऐसी संस्था का स्थान दिया गया है, जो केवल महिला और पुरुष को ही आपस में नहीं जोड़ती, बल्कि दो परिवारों को भी एक सूत्र में पिरो देती है लेकिन समय की मार से यह भी बच नहीं सका और इसमें भी बदलाव परिलक्षित हुए हैं. पहले विवाह संबंधी सभी निर्णय माता-पिता या परिवार के बड़े-बुजुर्गों द्वारा ही लिए जाते थे और अपने बच्चों की इच्छाओं को दबा, उन्हें आदेश के रूप मे विवाह योग्य लड़कों और लड़कियों पर थोप दिया जाता था. किंतु अब यह देखा जा सकता है कि माता-पिता अपने बच्चों की भावनाओं को भी अहमियत देने लगे हैं, जिसके चलते वह उनकी पसंद को भी ध्यान में रखते हैं. एक मुख्य बात यह कि जहां पहले अभिभावक (Guardian) संबंध जोड़ते समय केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यवसाय को ही महत्व देते थे, वहीं अब खासतौर पर महिलाएं, अपने होने वाले जीवन साथी (Life-Partner) के व्यवसाय (Occupation) और शिक्षा (Education)  को ज्यादा तरजीह देती हैं.


हाल ही में हुआ एक अध्ययन (Research) यह साबित करता है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ महिलाओं की विवाह संबंधी प्राथमिकताओं में भी अंतर आया है. अब महिलाएं केवल आमदनी (Income) को ही अहमियत नहीं देतीं बल्कि वह उन पुरुषों की ओर अधिक आकर्षित होती हैं जो एक अच्छे ओहदे (Designation) पर भी कार्यरत हों ताकि समाज में उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा कायम रह सके. इसके अलावा पेशे से नौकरी करने वाले पुरुष की आमदनी और छुट्टियां पहले से ही निर्धारित होती हैं, जिस कारण वह अपने परिवार और अपनी पत्नी को पर्याप्त समय के साथ-साथ, उनकी जरूरतों को भी पूरा कर सकता है.



शोधकर्ताओं (Researchers) की मानें तो महिलाएं सबसे अधिक डॉक्टरों (Doctors) और वकीलों (Lawyers) में दिलचस्पी लेती हैं और उन्हें अपना जीवन साथी बनाना चाहती हैं. इसके अलावा वह शिक्षकों (Teachers) को भी विवाह योग्य वर की सूची में रखती हैं  क्योंकि काम की समयावधि कम होने के साथ उनकी आय अच्छी होती है. इसके उलट व्यवसायियों को उन्होंने अपनी सूची के आखिरी स्थान पर रखा है क्योंकि भले ही उनकी आमदनी अच्छी हो लेकिन उनके काम के समय निर्धारित नहीं होते, जिसका नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact) उनके पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है.



उपरोक्त लेख के आधार पर तो यही कहा जा सकता है कि यदि आप भी एक अच्छे जीवनसाथी की उम्मीद रखते हैं तो हो सकता है आपको अपनी जॉब (Job) या व्यवसाय (Occupation)  बदलनी पड़े.


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