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कहीं महंगी पड़ ना जाए मस्ती

Posted On: 10 Sep, 2010 Others में

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सोशल साइट्स पर दर्ज अपडेट्स बन सकते हैं सबूत

social-networking-sitesआजकल सोशल नेटवर्किंग साइट का दौर है. चाहे ट्वीटर हो या फेसबुक हर कोई रोजाना अपने अपडेट पोस्ट करता रहता है. लेकिन अब सोशल नेटवर्किंग साइट का उपयोग करने वाले हो जाएं होशियार क्योंकि अब सोशल नेटवर्किंग साइट पर आपके अपडेट्स अदालती मामलों में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

सोशल नेटवर्किंग साइट ने दिया सबूत

30 वर्ष की अनु शर्मा को शक था कि उसका पति उससे बेवफाई कर रहा है क्योंकि वह हमेशा बिज़नेस का बहाना बनाकर कुछ दिनों के लिए बाहर चला जाता था. अनु शर्मा के शक की पुष्टि तब हुई जब एक दिन अनु ने अपने पति का ट्वीटर पर एक अपडेट देखा जिसमें लिखा था “आजकल मेरा समय शराब और दोस्तों के साथ बहुत अच्छा व्यतीत हो रहा है, इस समय मैं शहर में हूं. दोस्तों तुम भी मेरे साथ आओ और हम सब मिल मज़ा करें.” यह ट्वीट देख दूसरे ही दिन अनु ने अपने पति के खिलाफ़ अदालत में तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर दी.

cybercrime-hindi blogsकानूनी सलाहकारों का मानना है कि जब भी आप किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर कोई भी अपडेट या मैसेज करते हैं तो वह आपकी मन की अवस्था प्रकट करता है. अतः कानूनी मामलों में यह सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह खंड 2000 के आईटी अधिनियम के अंतर्गत आता है जिसे पिछले वर्ष संशोधित किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के वकील पवन दुग्गल का कहना है कि “वर्तमान समय का आईटी अधिनियम सन 2000 का है जिसमें मूलतः ई-वाणिज्य को बढ़ावा देने का संशोधन था. तब किसी ने सोशल नेटवर्किंग साइट का नाम भी नहीं सुना था. परन्तु आजकल सोशल नेटवर्किंग साइट का व्यापक प्रयोग होने लगा है अतः पिछले वर्ष इस अधिनियम को निगमित किया गया. और अब विशेष रूप से तलाक के मामलों में इस प्रवृत्ति का चलन बढ़ रहा है.

Lifestyle blogआमतौर पर इन संदेशों का प्रयोग माध्यमिक सबूतों के रूप में होता है परन्तु यह प्राथमिक सबूतों की तरह महत्वपूर्ण भी हो सकते हैं. दुग्गल के अनुसार अगर हम गुस्सा होकर भी कोई ट्वीट्स या संदेश (जैसे कि “मैं अपनी पत्नी से नफ़रत करता हूं”) करते हैं और अगर इन संदेशों का प्रिंटआउट या स्क्रीन शॉट अदालत में पेश होता है तो यह माध्यमिक सबूत माने जाते हैं.

हालांकि आईटी अधिनियम में यह संशोधन बहुत नया है इसलिए यह ज्ञात करना बहुत मुश्किल है कि कितने लोगों ने ट्वीट्स या संदेशों का प्रयोग सबूत के रूप में किया.
इस संशोधन का मुख्य विचार बढ़ते हुए साइबर क्राइम पर लगाम लगाना है जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बाधा पैदा कर सकता है.

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