blogid : 313 postid : 1300341

आज हैं 25 हजार करोड़ के मालिक...कभी नहीं थे खाने के लिए पैसे, अंग्रेजी से लगता था डर

Posted On: 17 Dec, 2016 Others में

जिएं तो जिएं ऐसेरफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

Lifestyle Blog

894 Posts

831 Comments

कहते हैंं, अगर हौसले मजबूत हो तो इंसान को कामयाबी पाने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. ऐसी ही कहानी का जीता जगता मिसाल है पेटीएम  के संस्थापक विजय शेखर. दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद विजय ने कभी नहीं सोचा था कि वो इतनी बड़ी संस्था के मालिक बनेंगे. शेखर शर्मा इनती ऊंचाईयों कैसे पहुंचे? जानें इनकी पूरी कितनी.


cover


अंग्रेजी की वजह से पढ़ने में आई दिक्कतें

यूपी के छोटे से शहर अलीगढ़ से आए विजय को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा. उनकी शुरुआती पढ़ाई एक हिंदी स्कूल में हुई थी. शुरुआत में शेखर को अंंग्रेजी बोलने और समझने में दिक्क्त होती थी, ऐसे में दिल्ली कॉलेज और इंजींंनियरिंग (डीसीई) में उन्होंने दाखिला तो ले लिया, लेकिन पढ़ाई उनके समझ से दूर थी. कॉलेज में जब उनसे अंग्रेजी में सवाल पूछा जाता, तो वो कुछ नहीं कह पाते, जिस वजह से लोग उनका मजाक उड़ाते थे.


Paytm11

कुछ दोस्तों ने अंग्रेजी में की मदद

जहां एक तरफ अंग्रेजी में हाथ तंग होने की वजह से शेखर ने कॉलेज से दूरी बना ली, वहीं उनके कुछ दोस्त उनकी अंग्रेजी बोलने और समझने में मदद करने लगे. शेखर ने बताया कि उनके हालात ऐसे हो गए थे कि वो कई बार परीक्षा में फेल हो गए. लेकिन दोस्तों की मदद और अपनी मेहनत की वजह से उन्होंने अंग्रेजी में खुद को काबिल कर लिया.


sekhar

अमेरिका में करने लगे नौकरी

अंग्रेजी अच्छी हो गई और शेखर को आखिरकार एक अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में काम मिल गया. शेखर भारत छोड़कर अमेरिका चले गए और वहां अपनी दुनिया बसा ली. लेकिन उनका खुद का सपना अभी अधूरा था. अपनी कंपनी खोलेने का सपना लिये शेखर का कुछ सालों बाद नौकरी से मन भर गया और एक दिन वो बिना बताए कंपनी छोड़कर चल दिए.


vijay sekhar

खुद की खोली कंपनी

शेखर के पास अनुभव था और कुछ पैसे थे, उन्होंने One97 कंपनी शुरू की. कुछ दिनों तक वो कंपनी अच्छी चली, लेकिन साल भर के भीतर कंपनी की हालत खराब होने लगी. कंपनी को बचाने के लिए शेखर उधार लेने लगे, लेकिन उधारी जब 8 लाख तक पहुंच जाए तो वो उधारी नहीं होती.

Vijay Shekhar

2005 मे पलटी किस्मत

इंटरनेट ने जैसे-जैसे पांव पसराना शुरू किया और लोगोंं ने मोबाईल के जरिए काम शुरू किया, तो शेखर की कंपनी को फायदा होने लगा और आखिरकार 2005 में कंपनी को फायदा पहुंचा. धीरे-धीरे कंपनी ने खुद को दोबोरा खड़ा किया और तब शेखर ने कुछ और सपनों को पर देने की सोची.


paytm

कैसे खड़ी की पेटीएम?

शेखर बताते हैं पेटीएम के शुरू होने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. किराने का सामान या ऑटोवाले को पैसे देते वक्त छुट्टे की दिक्कत ने शेखर को पेटीएम जैसी कंपनी बनाने के लिए प्रेरित किया. 2010 में पेटीएम का ख्याल शेखर के दिमाग में आया और उन्होंंने इसकी स्थापना कर दी. आज नोटबंदी के दौर में पेटीएम सभी का सहारा बन गया है.


Vijay-Sekhar-Sharma-Paytm

पेटीएम का टर्नओवर 25 हजार करोड़

कुछ रुपयों से शुरू हुई पेटीएम की कीमत आज 25 हजार करोड़ से ज्यादा है. कई हजार लोग इस कंपनी में काम करते हैं. विजय शेखर शर्मा की मेहनत और हार ना मानने का जज्बा ही उन्हें इस मुकाम पर ले आई…Next


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग