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पैसा बचाने के लिए प्रेम प्रस्ताव ही नहीं रखते पुरुष !!

Posted On: 10 Dec, 2011 Others में

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women proposing to menएक आदर्श प्रेम कहानी में पुरुष से ही यह अपेक्षा की जाती है कि वह जिस महिला से बेहद प्रेम करता है उससे जल्द से जल्द अपनी भावनाओं का इजहार कर दे. महिला द्वारा अपनी भावनाओं को स्वीकारने के बाद वह ना सिर्फ अपने लव-इंट्रस्ट के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखे बल्कि उसे विवाह करने के लिए राजी भी करे. आमतौर पर फिल्मों में भी ऐसी ही कहानियां दर्शायी जाती है जिसमें महिला और पुरुष एक-दूसरे को कितना ही पसंद क्यों ना करते हों लेकिन प्रेम संबंध की पहल करना हमेशा पुरुष का ही दायित्व होता है.


महिला की अपेक्षा पुरुष द्वारा अपनी भावनाओं का इजहार पहले करना भले ही कुछ लोगों को आउटडेटेड और परंपरागत लगे लेकिन यह परंपरागत तरीका आज के मॉडर्न और बोल्ड युवाओं को भी बहुत आकर्षक और रोमांटिक लगता है.


लेकिन एक नए शोध के अनुसार महिलाएं जो हमेशा पुरुष के प्रस्ताव इंतजार करती थीं आज जिस पुरुष को योग्य जीवन साथी समझती हैं, बिना देर किए स्वयं उसके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रख देती हैं.


लेकिन अगर आप ऐसा सोच रहे हैं कि महिलाओं की यह पहल उनकी बोल्डनेस को दर्शाती है तो आपको यह जानकर थोड़ी हैरत जरूर होगी कि ऐसा महिलाएं खुली मानसिकता के कारण नहीं बल्कि पुरुष की अनदेखी की वजह से कर रही हैं.

लंदन की एक ऑनलाइन साइट swoon.co.uk द्वारा हुए इस सर्वेक्षण में यह नतीजा सामने आया है कि हर दस में से एक महिला ने स्वयं पुरुष के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा है. हालांकि उनमें से अधिकांश महिलाएं हमेशा से यही चाहती थीं कि उनके जीवन में जो भी पुरुष आए वही उन्हें विवाह करने के लिए राजी करे.


डेली मेल में प्रकाशित इस रिपोर्ट की मानें तो हर पांच में से मात्र एक पुरुष ही परंपरागत तौर पर अपने लव-इंट्रस्ट के समक्ष प्रेम का इजहार करने में दिलचस्पी लेता है. वहीं दस में से एक ही अपने प्रस्ताव को लेकर उत्सुक रहता है और कई दिन पहले से ही इस बारे में सोचता है कि प्रपोज करने का कौन सा तरीका महिला को प्रभावी और आकर्षक लगेगा ताकि वह किसी भी रूप में प्रस्ताव को नकार ना पाए. पहले जहां एक पूर्व निर्मित और प्रबंधित योजना के तहत महिला को प्रपोज किया जाता था वहीं आज यह सब फिल्मों में ही देखने को मिलता है. असल जीवन में यह एक कल्पना से अधिक और कुछ नहीं रह गया है.


लगभग 15,000 लोगों को केन्द्र में रखकर किए गए इस शोध के प्रमाणों को देखकर संबंध विशेषज्ञ ट्रेवर सिलवेस्टर का मानना है कि ब्रिटिश लोगों के जीवन में घटते रोमांस का सबसे बड़ा कारण आर्थिक मंदी है. ऐसे समय में व्यक्ति अपनी इच्छाओं को कम कर देता है. वह जीवन को बहुत सामान्य तरीके से जीने लगता है. प्रेम प्रस्ताव के लिए वह ज्यादा व्यय करने की स्थिति में नहीं होता इसीलिए सस्ते उपायों को तलाशता है.


ब्रिटिश जो हमेशा ही ट्रेंडी और नए-नए तरीकों को खोजते हैं, अगर वह हमेशा से ही अपने प्रेमी को प्रपोज करते हैं तो इस शोध के बाद यह कहा जा सकता है कि उनके जीवन में रोमांस जैसी भावना के अब कोई मायने नहीं रह गए हैं. उनकी जीवनशैली इतनी ज्यादा जटिल और भौतिकवादी होती जा रही है कि अब वे प्रेम संबंधों में भी पैसे का महत्व और खर्च जैसी चीजे देखने लगे हैं. लेकिन भारत में आज भी आपसी संबंध उतनी ही अहमियत रखते हैं जितनी पहले रखते थे. उल्लेखनीय तथ्य यह है कि भारतीय लोग प्रेम प्रस्ताव रखने के लिए ऐसे तरीकों को मात्र अपनी कल्पना में ही रखते हैं. कुछेक को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश प्रेमी जोड़ों में जिसने भी पहल की, उसने कभी अपने प्रेमी को प्रपोज करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं की होगी. लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि वे एक-दूसरे के लिए प्रतिबद्ध या समर्पित नहीं हैं. कारण बस इतना है कि भारत में संबंधों में औपचारिकता को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता. हां, अगर हम आज के युवाओं के विषय में बात करें तो वह हर समय कुछ ना कुछ नया करने की कोशिश करते हैं. युवक अपना अधिकांश समय इसी सोच में बिता देते हैं कि वे अपने प्रस्ताव को प्रभावी कैसे बनाएं, ताकि युवती समेत अन्य लोगों के लिए भी वह एक आदर्श बन सकें.


वैसे इसमें कुछ बुराई तो नहीं है लेकिन अगर प्रेम की गहराई को प्रपोज करने के तरीके और अंदाज से मापा जाएगा तो यह थोड़ा हास्यास्पद और निरर्थक जरूर बन पड़ेगा.


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