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हर झगड़े की शुरुआत पत्नियां ही करती हैं !!

Posted On: 5 May, 2012 Others में

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वैवाहिक संबंध को अपनाने के बाद जब दो व्यक्तियों को एक-दूसरे के साथ रहना पड़ता है तो ऐसे में स्वभाव और मत भिन्नता के कारण पति-पत्नी में मतभेद और छोटे-मोटे झगड़े होना आम बात है. वैसे भी यह माना जाता है कि आपसी संबंध और समझ को मजबूती देने के लिए कभी-कभार दंपत्ति में मनमुटाव होना जरूरी भी है, क्योंकि ऐसे हालात उन्हें एक-दूसरे के और नजदीक ले आते हैं. लेकिन फिर भी कई बार यह समझा जाता है कि दांपत्य जीवन में अधिकांश झगड़ों की शुरुआत महिलाओं के कारण होती है.


अब एक नए अध्ययन हो ही ले लीजिए, इस सर्वेक्षण की मानें तो एक औसत दंपत्ति वर्ष में लगभग 167 बार आपस में लड़ते हैं, जिनमें अधिकांश हालातों में महिलाएं ही किसी बात पर अपने पति से उलझ पड़ती हैं.

फोन पर पत्नी से झगड़ा करते हैं तो संभल जाइए !!


couple-fighting-on-couchडेली एक्सप्रेस में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार दंपत्ति किसी ना किसी मुद्दे को लेकर हर साल 167 बार एक-दूसरे से उलझते हैं. ब्रिटेन के सबसे बड़े होटल ब्रांडों में से एक, प्रीमियर इन द्वारा संपन्न इस अध्ययन में यह कहा गया है कि ब्रिटेन में हर दस में से एक दंपत्ति में साथी के तेज खर्राटों के कारण झगड़ा होता है.


रिपोर्ट की मानें तो 20 प्रतिशत से अधिक दंपत्ति खर्राटों की आवाज से होने वाले शोर के कारण अपनी 2 घंटे की नींद तक गंवा देते हैं. इतना ही नहीं 10 प्रतिशत लोगों का तो यह भी कहना है कि कभी-कभार तो वह एक-दूसरे से अलग होने के बारे में भी सोच लेते हैं.


उपरोक्त अध्ययन को अगर हम भारतीय परिवेश के अनुसार देखें तो हम इस बात को नकार नहीं सकते कि यहां भी पति-पत्नी के बीच झगड़े होते हैं. लेकिन इन झगड़ों के पीछे कारण कभी भी एक समान नहीं रह सकते और ना ही किसी एक को ही दोषी ठहरा सकते हैं.


भारतीय समाज में विवाह एक धार्मिक और सामाजिक संस्था का नाम है जो महिला और पुरुष को आजीवन के लिए एक-दूसरे के साथ बांध कर रखता है. छोटे-मोटे झगड़े उनके संबंध की मजबूत नींव को हिला नहीं सकते.


लेकिन हां, हम इस बात को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते कि कभी-कभार पति-पत्नी को ऐसे हालातों का सामना करना पड़ता है जिन्हें सुलझा पाना उन दोनों के बस में नहीं होता. लेकिन फिर भी उनके संबंध को परिवार का संरक्षण प्राप्त होता है जो उन्हें फिर से एक बार साथ ले आता है. इसीलिए अगर हम भारतीय परिदृश्य में इस रिपोर्ट को देखें तो यहां हर झगड़े का अंत अलग होना नहीं होता.


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