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काफ़ी है,,,

Posted On: 31 Jan, 2018 Others में

meriabhivyaktiyaJust another Jagranjunction Blogs weblog

lily25

125 Posts

73 Comments

पहुँच जाता है हूजूम
हर जगह
एक कदमों के निशां
काफी हैं,,,

शहरों में भी होते हैं
कोने सुबुकते
सन्नाटा दिले दरमियां
हो काफ़ी है,,

तलाश ठोंकरे खाती
दर ब दर
नही दिखते पत्थरों पे
निशां,काफ़ी है,,

मंज़िलों के बड़े ऊँचे
चढ़े हैं भाव,
जेबें तार तार हो देती
हैं जवाब,काफ़ी है,,

नसीब फिसलती रेत सा
झरता शबाब,
हथेली में चिपका रहे ज़रा
सा आब,काफ़ी है,,,

उम्मीद की लौ फड़फड़ा
के जले,,
दिख जाए सामने का
सैलाब,काफ़ी है,,,

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