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...इस शहर का हर रास्ता सूमसाम-सा क्यूं है????

Posted On: 2 Apr, 2011 Others में

मेरी आवाज सुनोमेरी आवाज़ ही पहचान है॥

razia mirza listenme

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cricket

अभी परसों ही बाज़ार के लिये नीकली सोचा कुछ ज़रूरी सामान लाना है ले लुं।

एक तो गरमी के मारे बेहाल हो रही थी और फ़िर हर दुकान बंद ।

क्या ये सब गरमी की वजह से था?

अरे नहिं । याद आया!!!

आज लोग घर के बाहर कैसे  निकलें  भाई?

आज तो भारत-पाकिस्तान का सेमिफ़ाइनल खेला जाना है!!

सरकारी महेकमों में लोग छुट्टी पर हैं । आज कोई काम नहिं है।

ये खेल ही ऐसा है कि लोग इतने पागल-दिवाने हो रहे हैं।

चलिये हमारी टीम ने आख़िरकार पाकिस्तान को हरा ही दिया।

ये खेल ही ऐसा है ।

अरे सिर्फ़ इंसान ही नहिं….

……बल्कि हवाएँ भी थम गईं हैं।

पेडपत्ते भी चूपचाप ख़डे रह गये हैं।

मानो किसी ने कह दिया हो… Stop It.

और जब कोई विकेट जाती है तो यकायक कहीं से शोर उठता है।

कोई बिमार भी खडा होकर दौडने लगे।

कल बेचारे नाख़ूनों का भी बूरा हाल होगा।

एक एक बोल पर नजाने कितने नाख़ून मुंह से काट दिये  जायेंगे।

और ….. धोनी की टीमइन्डिया वर्ल्ड कप ले आयेगी। इन्शाअल्लाह!!!

चलो अब रज़िया तुम भी सो जाओ। सुब्ह जल्दी उठकर  से काम से निपट जाओ।

क्योंकि कल तो फ़ाइनल मुकाबला है!!


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