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"क्षितिज के उस पार या इस पार???"भाग- 3

Posted On: 9 Oct, 2010 Others में

मेरी आवाज सुनोमेरी आवाज़ ही पहचान है॥

razia mirza listenme

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      आज  सब चहेरों पर ख़ुशी है क्यों की “श्री योगक्षेम मानव संस्थान मानव अधिकार” के कार्यकर्ता कुछ वकीलों के साथ यहाँ आनेवाले थे| जिन बंदिओं के वकील नहीं हैं उन्हें काय्दाकीय मदद करनेके लिए आ  रहे थे| जो बंदी ६० साल के ऊपर के है उनके नाम लिखे जा रहे थे शायद सरकार या सुप्रीम कोर्ट से उन लोगों की रिहाई की अपील की जानी थी|” मंजू माँ “अपने बोखे मुंह से मेरी और देखकर मुस्कुरा रही थी|

यहाँ के सभी बच्चे भी रंगीन कपड़ों में  तैयार होकर बैठे थे| क्यूं की आज उन्हें भी बगीचे में और सर्कस दिखने को ले जानेवाले हैं| सब की नज़र दरवाज़े पर लगी हुई थी की एक बेल बजी| बच्चों की किलकारियां गूंज उठीं| बंदी महिलाएं अपनी साड़ियों को ठीक करने लग गयी| और वो लोग आ गए| एक के बाद एक के नाम बोले गए | सभी कुछ “उम्मीदों ‘ के साथ अपने अपने नाम लिखवाने लगे|
     आज “फिजा”, बाबू” और सभी बच्चे खुश है क्यों की उन्हें इस बड़े “दरवाज़े’ के उस पार की दुनिया देखना है| पता नहीं सर्कस किसे कहते है| “हाँ’ ये पता है की आज बिल्ली और बन्दर के अलावा कोइ और भी  पशु/ पक्षी  देखने को मिलेंगे | आज बच्चों को संस्थान तरफ से तरहां तरहां के खिलौने और पेन,किताबें,टोपी और कपडे मिले हैं|

यहाँ एक उम्मीद है की कब बोर्ड पर केस आ जाये और वो निर्दोष हो जाए| जिनके केस सुप्रीम कोर्ट से भी रिजेक्ट हो चुके हैं उन्हें तो पता है की उनकी ज़िन्दगी के १४ साल यहीं कटने वाले हैं ये उन्हों ने स्वीकार भी कर लिया है|

उन्हें न तो “बाबरी मस्जिद या रामजन्मभूमि” के विवाद से मतलब है या इलेक्शन के परिणाम से मतलब !!!

 वो तो जब संगीत सिखानेवाली दीदी के साथ बैठकर “राग भूपाली” ,मालकौंस ,मेघ,दुर्गा, के आरोह,अवरोह में अपनी ज़िन्दगी की सरगम को गुनगुनाते रहते हैं| तो कभी सिलाई सिखानेवाली दीदी के सहारे सिलाई मशीनों में डूब जाते है तो कभी कढहाई/बुनाई के रंगीन धागों में अपने जीवन के सालों को बुनने लग जाते हैं|५५ साल की  “कमरुन्निसा” कहती हैं की मुझे अब नजदीक का कम देखता है पर ऐनक लगाकर भी सीख जाउंगी और अपनी नाती-पोती को अपना हुनर सिखालाउंगी| “सीता” अंग्रेजी सीख रही है| कहती है जब बाहर जाउंगी तो फटाफट अंग्रेजी बोलकर सब को चोंका दूंगी| पर उसे ये नहीं पता की हर महीने सरकारी अस्पताल में जो इंजेक्शन लेने जाना पड़ता है वो “कीमोथेरेपी” है| और अभी उसकी बीमारी चौथे स्टेज पर है|
 “मधु” को एक अजीब इन्फेक्शन उसके पतिने दिया है| वो तो भगवान के पास चला  गया पर उसे HIV देकर चला गया|  अब उसे भी cd4 count के लिए हर बार अस्पताल ले जाया जाता है|

अजीब दुनिया है ये!!!!

पर इतना ज़रूर कहूँगी यहाँ न तो उंच-नीच के भेद है ना तो धर्मो के भेद है और ना ही प्रान्तों के भेद यहाँ तो सारा के सारा भारत बसा है| यहाँ हर त्यौहार बड़े ही चाव से मनाया जाता है | चाहे गणेशचतुर्थी हो या नवरात्री| या गरबा या रमजान !!!!
यहाँ सम्पूर्ण भारत दर्शन होता है|

पर दर्दो-गम के बीच|

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