blogid : 1412 postid : 553

मेरे बाबा!!फाधर्स डे पर मेरे आँसुंओं का तोहफ़ा!!!

Posted On: 20 Jun, 2011 Others में

मेरी आवाज सुनोमेरी आवाज़ ही पहचान है॥

razia mirza listenme

88 Posts

716 Comments

धक..धक..धक..धकमौत का काउनडाउन शुरु हो चुका था।

मेरे बाबा(पिताजी) हम सब को छोडकर दुनिया को अलविदा कहने चले थे।

अभी सुबह ही तो मैं आईथी आपको छोडकरबाबा

मैं वापस आने ही वाली थी। और जीजाजी का फोन सुनकर आपके पास भी गई। आपके सीनेपर मशीनें लगी हुईं थीं।

आप को ओकसीजन की ज़रुरत थी शायद ईसीलिये। फ़िर भी आप इतने होश में थे कि हम तीनों बहनों और भाइ को पहचान रहे थे। आई.सी.यु में किसी को जाने कि ईजाज़त नहिं थी

….पर बाबाहमारा दिल रो रहा था कि अभी एक ही साल पहले तो मेरीअम्मी हमें छोडकर जहाँ से चली गई थीं आप हम सब होने के बावज़ुद तन्हा ही थे।

हम सब मिलकर आपको सारी खुशियों में शरीक करते …..

परबाबाआप !!हर तरफ मेरी अम्मीको ही ढूंढते रहते थे। आपको ये जहाँ से कोई लेना देना ही नहिं था मेरी अम्मीके जाने के बाद।

क्याबाबा ये रिश्ता इतना ग़हरा हो जाता है?

मुझे याद है आप दोनों ने हम तीनों बहनों को समाज और दुनिया कि परवा किये बिना ईतना पढाया लिखाया लोग हम बेटीयों को पढाने पर ताने देते रहते थे आप दोनों को।

पर आप और अम्मी डटे रहे अपने मज़बूत ईरादों पर। यहाँ तक की आप ने हमारी जहाँ जहाँ नौकरी लगी साथ दिया। आपको तो था कि हमारी बेटीयाँ अपना मकाम बनायें।

औरबाबा आप दोनों कि महेनत रंग लाई। हम तीनों बहनों और भाई सरकारी नौकरी मे अव्वल दर्जे के मकाम पर गये। शादीयाँ भी अच्छे ख़ानदान में हो गईं।आप ने हमारे लिये ना धूप की परवा की ना बारिश की।

अपने आपको पीसते रहे जीवन की चक्की में।

आप दोनों ने हमारे लिये बहोत सी तकलीफ़ उठाई शायद हम भी इतनी अपने संतानों के लिये नहिं उठा सकते।

समाज को आपका ये ज़ोरदार जवाब था। आप दोनों महेंदी कि तरहाँ अपने आपको घीसते रहे और हम पर अपना रंग बिखरते रहे अरे आप दोनों दिये कि तरहाँ जलते रहे |

औरहमारी ज़िन्दगीयों में उजाला भरते रहे। आप की ज़बान पर एक नाम बार बार आता रहामुन्ना ! हम तीनों बहनों का सब से छोटा भाई!बाबा हमारे छोटे भाईमुन्नाने भी आप को बचाने के लिये बहोत कोशिश की है।

बाबा हमें थोडी सी ठोकर लगती आप हमें संभाल लेते। आप पर लगी ये मशीनरी मेरी साँसों को जकड रही थी। और आप हमारा हाथ मज़बूती से पकडे हुए थे कि

हम एकदूसरे से बिछ्ड जायें। मौत आपको अपनी आग़ोश में लेना चाहती थी। हम आपको ख़ोना नहिं चाहते थे।बाबा आपकी उंगलीयों को पकड्कर अपना बचपन याद कर रही थी मैं। वही उंगलीयों को थामे हम आज इस राह पर ख़डे हैं। आप दोनों ने हमारे लिये बडी तकलीफ़ें झेली हैं। आप हमें अपनी छोटी सी तंन्ख़्वाह में भी महंगी से महंगी किताबें लाया करते थे।

आपकी भीगी आँखों में आज आंसु झलक रहे थे। बारबार हम आपकी आँखों को पोंछ्ते रहे। नर्स हमें बार बार कहती रही कि बाहर रहो डोकटर साहब आनेवाले हैं।

मुझे गुस्सा रहा था कि आपको डीस्चार्ज लेकर घर ले जाउं कम से कम आपको तन्हाई तो नहिं महसूस होगी। हम दो राहे पर थे या तो आपकी जान बचायें या फ़िर आपके पास रहें।

धक..धक..धक.. में आप खामोश हो गये थोडी देर आँखें खोलकर बंद कर लीं आपने। हमें लगा आप सो रहे हैं

पर…. डोकटर ने आकर कहा ” He is expired”

आप हमें छोडकर आख़िरअम्मी के पास पहोंच ही गये।बाबाआपकी तस्वीर जो पीछ्ले साल ली गई थी मेरे पास है आपअम्मीकी क़ब्र पर तन्हा बैठे हैं|

baabaa

आज आपको भी बिल्कुल अम्मी के पास ही दफन कर आये हैं हम।

आपकी यादें हैं हमारे लिये बाबा यह लिखते हुए मेरी आँख़ों के आगे आँसुओं कि चिलमन जा रही है।

छीप छीपकर पोंछ रही हुं ताकि कोई मुझे रोता हुआ देख ले।

ये कैसी विडंबना हैबाबा”!!!!

बाबा”मैं अब बहोत कम आपके घर जाती हुं ..

क्योकि आप और अम्मी की वो हर जगह याद आती है ….

और मैं जब भी जाती हुं आपदोनों को ढुंढती रहती हुं।

आप का बिस्तर,कुर्सी जिस पर बैठकर आप किताबों के पन्ने पलटाया करते थे।

क्या लिखुं बाबा !!!  बहोत लिखना है पर लिख नहिं पाती। ये आँसु कुछ लिखने नहिं दे रहे।

बार बार पोंछ्ने पडते हैं इन्हें।

बाबा आपने तो हमारी ज़िन्दगी लिख दी है।

हम क्या तोहफ़ा दे सकते हैं आपको भला???सिर्फ़ आँसु!!!!!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग