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मरती हुई इंसानियत

Posted On: 16 Apr, 2013 Others में

मैं, लेखनी और जिंदगीगीत, ग़ज़ल, बिचार और लेख

Madan Mohan saxena

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जयपुर की घटना को आज टीवी पर देखा.
सड़क पर एक महिला की लाश.
बेबस घायल बच्चा
और अपनी किस्मत पर रोते उसके पिता को.. !
और देखा मंहगी गाड़ी
जो पास से गुजर रही थी
और उन में बैठे दो कौड़ी की औकात वाले
अपने की इंसान कहने वाले
समाज के लोगों को !
देखा
बस में से झांकते लोगो को
जो सिर्फ नाटक देखने और तालियाँ पीटने की ट्रेनिग लेते हैं बड़े बड़े आदर्शो से
जिनमे कभी कभी मैं खुद भी होता हूँ !
और देखा.. मरती हुई इंसानियत को
बहते हुए भावनाओं के खून को.. !
बहुत दर्द हुआ
आखिर क्यों
आज का मानब इतना स्वार्थी हो गया है
आखिर क्यों
कामचोरी धूर्तता चमचागिरी का अब चलन है
बेअरथ से लगने लगे है ,युग पुरुष जो कह गए है
दूसरो का किस तरह नुकसान हो सब सोचते है
त्याग ,करुना, प्रेम ,क्यों इस जहाँ से बह गए है.

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