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इतिहास बिसारने का अक्षम्‍य अपराध

Posted On: 7 May, 2014 Others में

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Madhuresh , Jagran

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आम्रपाली को जानते हैं? अरे, वैशाली की नगरवधू। जिस पर ढेर सारे उपन्यास हैं; फिल्में बनीं; तरह-तरह के प्रसंग, दास्तान हैं; किवंदती है। उनका अपना जमाना था। लंबा- चौड़ा इतिहास है। आम्रपाली के लिए मगध सम्राट बिम्बिसार ने लिच्छवी गणराज्य (वैशाली) पर हमला कर दिया था। बिम्बिसार -आम्रपाली प्रेम, महात्मा बुद्ध …, ईसा पूर्व 500 का खासा कालखंड आम्रपाली के नाम है।

आम्रपाली, अम्बारा (वैशाली) में जन्मी थीं। यहीं के एक आम के बगीचे में एक नन्हीं परी मिली थी, जिसे लिच्छवी गणराज्य में नगरवधू बना दिया गया था।

लेकिन आज अम्बारा में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो बताए कि आम्रपाली यहीं जन्मी थीं, यहीं मिली थी? बेशक, हजारों वर्ष गुजर गए। लेकिन जन्मस्थान के अवशेष या उनकी स्मृति या फिर इन दोनों के मेल से कोई एक निश्चित स्थान को लेकर बना ली गई धारणा भी तो होनी चाहिए। कोई मूर्ति, चबूतरा, ईंट -पत्थर, कुछ भी तो होना चाहिए। यहां ऐसा कुछ भी नहीं है।

फिर है क्या? संगमरमर पर उखड़े अक्षर वाला एक छोटा सा शिलापट्ट। यह ईंट के उस जालीदार सरकारी घेरे पर लगा है, जो पौधे की सुरक्षा के लिए बनता है। इस पर लिखा है- डीआइजी अरविंद पांडेय एवं प्रमंडलीय पदाधिकारी विजय नारायण द्वारा 28 फरवरी 2008 को आम्रपाली की याद में इस आम के पौधा को लगाया गया है, जिसे अम्बा का नाम दिया गया है। सौजन्य : आम्रपाली फाउंडेशन। सदस्य : अनमोल कुमार सिंह।

साफ है पौधा पंद्रह साल पहले लगा था। यह पेड़ नहीं है। हां, शिलापट्ट, सुरक्षा का जालीदार इंतजाम जरूर है। इसमें शराब की कुछ टूटी बोतलें, पैकेट, मैगी के रैपर आदि पड़े हैं। मैं जब पहुंचा, तो इस पर एक जिंस भी सूख रहा था। मुझे बताया गया यही आम्रपाली कैंपस है। यहां एक छोटा सा स्कूल है। नाम-राजकीय प्राथमिक विद्यालय अम्बारा तेज सिंह (अंचल सरैया, मुजफ्फरपुर)। बगल के दो कमरे वाले खपरैल की दीवार पर मध्याह्न भोजन का मेनू दर्ज है। इसमें बच्चों की खिचड़ी बनती है। एक और कमरे के बारे में बताया गया कि यह गांव वालों का बैठका है। चहारदीवारी है। चारों तरफ मानों जबरिया दखल कर लगाई गई गुमटीनुमा दुकानें। दारू की दुकान से लेकर अंडा-मछली फ्राई तक। चाय-पान की दुकानें। सबकुछ है। बस आम्रपाली नहीं हैं। कहीं नहीं हैं। लेकिन लोग बताते हैं कि तब यहीं आम का बड़ा बगीचा था। वह यहीं मिलीं थीं। बहुत पहले यहां एक मूर्ति थी। पहले पांच डिसमिल जमीन थी। अब दो डिसमिल बची है। बाकी अतिक्रमण का शिकार हो गई। थोड़ा आगे आम्रकुंज है। कुछ ने आम्रपाली के यहीं मिलने की बात कही। लेकिन यहां भी ऐसा कुछ नहीं है, जिसे आम्रपाली के जन्म या मिलने के स्थान के रूप में कायदे से परिभाषित किया जा सके।

यह इतिहास को बिसारने, उसको तबाह कर देने का अक्षम्य अपराध नहीं है? आपकी क्या राय है?

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