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राजनीति का राग ..., प्रेम की दशा

Posted On: 18 Nov, 2013 Others में

फंटूशJust another weblog

Madhuresh , Jagran

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मैंने पहली बार जाना है कि राजनीति में भी प्रेम की दशा होती है। भारतीय साहित्य, प्रेम की आठ दशा बताता है। रोमन साहित्य में नौ दशा दर्ज है। खैर, नार्मल प्रेम की तरह यहां की राजनीति में प्रेम के लगभग ये सभी स्टेज (चरण) हैं। आप भी जानिए।

उस दिन प्रो.रामकिशोर सिंह (जदयू नेता) अपनों को प्रेम का पाठ पढ़ा रहे थे-सुशील कुमार मोदी (भाजपा नेता), प्रेम के चौथे स्टेज उपालम्ब (उलाहना) को पार कर पांचवें में प्रवेश कर चुके हैं। यह उन्माद या उद्वेग की दशा है। इससे पहले वे विलाप, प्रलाप व उद्वीपन के चरण में थे। फिर जड़ता में आएंगे। यह प्रेम की छठी दशा है। तब मूर्छा। प्रेम की सबसे आखिरी दशा जुगुप्सा की होती है। इसमें बेहोश आदमी वीभत्स स्थिति में पहुंच जाता है। प्रोफेसर साहब बुजुर्ग हैं। अपने अनुभव के आधार पर गारंटी कर रहे हैं कि मोदी जी इस आखिरी दशा को जरूर प्राप्त करेंगे। उन्होंने तो रोमन साहित्य के हवाले मोदी जी के लिए नौंवी दशा, यानी मरण की भी मुनादी की है। प्रोफेसर साहब ने इन सभी चरणों के लक्षण बताए हैं। सुशील मोदी को इन सभी लक्षणों से परिपूर्ण बताया है।

मुझे लगता है रामकिशोर बाबू प्रेम और संबंध के बड़े ज्ञानी हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले सुशील मोदी को कुख्यात आतंकी यासीन भटकल का बहनोई बता दिया था।

चलिए , अच्छी बात है कि शब्दों की मर्यादा को लजा देने वाली राजनीतिक लड़ाई में प्रेम और संबंध जैसे सुनने में अच्छे लगने वाले सिचुएशन आ रहे हैं। वरना …?

मैं, नरेंद्र सिंह को सुन रहा था-नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े आतंकवादी हैं। जैसे रंगबाज, गुंडा, अपराधी को अपनी जान का डर होता है, वह अपनी जान बचाने को बंदूक वाला लेकर घूमता है, उसी तरह नरेंद्र मोदी भी कर रहे हैं। बाप रे …, यह कौन सी दशा है? इस राग पर तो कोई भी कांप जाएगा जी।

अभी भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी बोल गईं कि बिहार में मानसिक आरोग्यशाला की जरूरत है। उनके इस राग का अर्थ यही था कि जदयू के नेता पागल हो गए हैं। उनको इलाज की जरूरत है। जदयू ने भाजपा से पूछ दिया कि क्या भाजपाई बिहार में पागलखाना खोलना चाहते हैं? मीनाक्षी की दशा भी बता दी गई। उनके लिए सलाह आई-कोइलवर में सरकारी मानसिक आरोग्यशाला है। यहां बड़ा सुरम्य प्राकृतिक वातावरण है। आप चाहें तो यहां इलाज करा सकतीं हैं। मुफ्त में इलाज होता है। इस राग या दशा को क्या कहा जाएगा?

मैं, बिहारियों को अचानक हुई नमक की बीमारी देख रहा था। नई बीमारी थी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्याम रजक का राग सुनिए-भाजपा जिम्मेदार है। … जो पार्टी गणेश जी को दूध पिला सकती है, जो पूरे देश से लोहा इक_ा कर सकती है, घर-घर से ईंट मंगवा सकती है, तो उसके लिए नमक गायब कराना तो बहुत मामूली बात है। जदयू प्रवक्ता संजय सिंह अफवाह फैलाने के लिए सुशील मोदी पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। मोदी जी का राग सुनिए-सरकार फेल हो गई है। वह अपनी नाकामयाबी का ठीकरा फिजूल में हमारे सिर फोड़ रही है। गजब है। ये कौन सी दशा है भाई?

मैं देख रहा हूं-भाई लोगों ने ऐसा और इतना राग अलापा कि अब तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बोलने लगे हैं। उनके झाड़ू वाले बयान की कई- कई दशा, उसका रंग अब तक दिख रहा है। बड़ी लम्बी दास्तान है। मैं मानता हूं कि राजनीतिशास्त्र की दशा का यह स्टेज दुनिया को नए शोध से खूब वाकिफ कराएगा। उसी तरह जैसे हम लोकतंत्र की अवधारणा से दुनिया को वाकिफ कराने का गौरव रखे हुए हैं। यह इक्कीसवीं सदी के बिहार की दशा है भाई।

मैं, शनिवार को सभी पार्टियों के नेताओं को सुन रहा था। उन्होंने 14 वें वित्त आयोग से बिहार के लिए चार लाख करोड़ मांगें हैं। मुझे बड़ा अच्छा लगा उस सर्वदलीय चर्चा को सुनकर, जिसके हर स्तर पर बस बिहार, यहां का अविकास, भूख और जलालत थी; विकास की लम्बी छलांग की एकजुट कामना थी। इसकी उम्र? इसका परिणाम? कुछ भी छुपा है? मुझे आज तक समझ में नहीं आया है कि आखिर राजनीति का राग, बुनियादी मसलों पर एकजुटता की दशा को क्यों नहीं प्राप्त होता है? दिक्कत क्या है? कोई बताएगा?

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