blogid : 21368 postid : 882585

दहला पकड़ (घनाक्षरी छन्द)

Posted On: 9 May, 2015 Others में

maharathiJust another Jagranjunction Blogs weblog

Maharathi

79 Posts

74 Comments

मैंने पूछा नेता जी से तास खेलते हैं आप

बोले राजनीति का ही खेल हम खेलते हैं

यहाँ चार रंग हैं तो वहां चार पार्टी हैं

यहाँ ट्रम्फ वहां सरकार तुम झेलते

इक्का राष्ट्रपति बादशाह है प्रधानमंत्री

गुल्ला बेगम मंत्री का रुतबा हैं पेलते

शेष अवशेष सब मन्तरी के संतरी हैं

चलें सभी चालें खास चाल खास ठेलते।।1।।

पपलू है आम जन मुख्य खेल से है दूर

वहाँ एक खेल डबल हैण्ड मारा जाता है

दहले पे पहले ही हाथ साफ करने को

बिछी हैं बिसातें अब चालें चले जाता है

दुग्गी हो या दहला चलें हैं चालें नित नई

मंतरी ही संतरी पे भारी पड़ जाता है

पर कभी कभी दुग्गा आता है विरोधियों का

मंत्रीजी की जान का बवाल बन जाता है।।2।।

एक चाल पूरी हो तो नई डील नई ट्रम्फ

फिर एक नई सरकार बन जाती है।

कभी ट्रम्फ एक रंग की कभी दूसरे की देखो

कभी लगातार एक ही की लग जाती है।

पत्ते वे ही बावन हैं चाहे पूरे दिन खेल

जनता है कि वो बेवकूफ बन जाती है

हैं समान खेल दोनों एक में घोटाला और

दूसरे में बेइमानी खूब फल जाती है।।3।।

ध्यान दहले पे रख नेता जी जलील करें

छोटे खेल खेल रही जनता बिचारी है

प्रिय मित्र राजनीति के बड़े खिलाड़ी आप

जन के हैं नायक अरु जनता विसारी है

पाँच वर्ष बाद फिर आना सपने दिखाना

धोखा देना भाग जाना काम सरकारी है

प्रिय कोई कैसी भी ना गलती करे हैं आप

सपनों के पीछे हम गलती हमारी है।।4।।

मैं खिलाड़ी छोटा ताल ठोक तास खेलता हूं

जिस दिन तास बदरंग हो जाऐंगे

तास की ये गड्डी मान के गले की हड्डी फिर

फाड़ फेंक दूंगा तास दूर हो जाऐंगे

गड्डी हड्डी छोड़ के कबड्डी खेल खेल लेंगे

अपनी है क्या कि हम यूं ही तर जायेंगे

आप हो खिलाड़ी बड़े छोटा खेल भाये नहीं

कैसे तो जियेंगे और कैसे मर पायेंगे।।5।।

डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी

वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.)

+919319261067

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग