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नवभारत का राष्ट्रवाद

Posted On: 22 Apr, 2019 Politics में

Jeevan namaJust another weblog

mangalveena

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भारत में सत्रहवीं लोकसभा के सात चरणों में होने वाले चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। राजनीतिक दलों द्वारा अपने अनुकूल मुद्दों को उछालने एवँ प्रतिकूल मुद्दों को विरोधियों का षड्यंत्र बताने का बेहया प्रयास जारी है।इस बीच देश के जनमानस में एक बहुत बड़ा मुद्दा राष्ट्रवाद के रूप में उभरा है। केंद्र की भाजपानीत मोदी सरकार के  विगत पाँच वर्षीय शासन काल में राष्ट्रवाद, सबका साथ सबका विकास के साथ, चल रहा था परन्तु  चौदह फरवरी को फुलवामा (कश्मीर) में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के ऊपर पाकिस्तान प्रायोजित  जैश आतंकी हमला होते ही सरकार व जनता में पाकिस्तान को पाठ पढ़ाने की ज्वाला फूट पड़ी।प्रधान मंत्री मोदी जी का बयान आया कि पाकिस्तान एवँ उसके आतंकियों ने बड़ी गलती कर दी और उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। हुआ भी ऐसा ही,भारतीय वायुसेना ने 25 /26 फरवरी की रात में पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंकी शिविरों पर सफल एयर स्ट्राइक किया।विश्व के अधिकाँश राष्ट्र जैसे अमेरिका ,इंग्लॅण्ड ,फ्राँस ,सोवियत रूस,जापान इत्यादि देश भारत के साथ खड़े हो गए।अमेरिका ने तो यहाँ तक कह दिया कि भारत को प्रतिकार का पूरा हक़ है।जब पाकिस्तानी वायु सेना ने 27 फरवरी को भारत पर जवाबी हमला किया ,विंग कमाण्डर अभिनन्दन ने मिग से उड़ान भर कर एक पाकिस्तानी ऍफ़ -16 जंगी जहाज को मार गिराया और खुद पैराशूट से छलाँग लगा लिया परन्तु दैववश पाकिस्तानी सीमा में जा गिरा। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए लाचार पाकिस्तान को दो दिनों के अंदर(एक मार्च 2019 )ही  अभिनन्दन वर्तमान को वापस सौंपना पड़ा।मोदी जी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते दबदबा और सामरिक शक्ति से पूरा देश झूम उठा।साथ ही इन सोलह -सत्रह दिनों में भारत ने एक बदलाव का तीव्र आवेग देखा।यह बदलाव था प्रखर राष्ट्रवाद ,जिसकी अगुवाई प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में करोड़ों राष्ट्रवादी भारतीय करने लगे थे। सदिओं से एक नरम राज्य के रूप में पहचाने जाने वाला भारत एक कठिन राज्य बन गया अर्थात एक थप्पड़ मारने वाले को दस थप्पड़ मारने वाला भारत बन गया। फिर क्या ; सत्रहवीं लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही राष्ट्रवाद  सारे मुद्दों व प्राथमिकताओं को पीछे छोड़ते हुए चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।

वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत इस चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि भुखमरी,पेट्रोल ,मँहगाई ,बिजली ,सड़क ,स्वास्थ्य ,शिक्षा जैसी समस्याएँ चुनावी नैपथ्य के पीछे चली गईं हैं और देशभक्ति ,देशद्रोह, घुसपैठ ,कश्मीर संवंधित धारा 370 एवं 35 A ,सेना को अशान्त क्षेत्रों में अधिकाधिक  सुरक्षा कवच ,आतंक को कुचलने की रणनीति और भारत की सामरिक एवँ आर्थिक शक्ति बढ़ाने वाली या इनको क्षीण करने वाली या कुछ एक को समाप्त करने वाली घोषणाएँ रंगमंच पर परवान चढ़ रही हैं। ए सारे मुद्दे राष्ट्रवाद के ही अलग अलग धनात्मक या ऋणात्मक आयाम हैं। जहाँ मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा इन राष्ट्रवादी मुद्दों को पूरे जोश से उठा रही है वहीं भारतीय जन मानस भी इन मुद्दों पर भाजपा को भरपूर समर्थन दे रहा है।विपक्ष इन्हीं मुद्दों के ऋणात्मक आयाम को अपने घोषणापत्र में डाल कर जोर शोर से अपनी ढफली बजा रहा है।सारे विपक्षी दल का एक जुट होकर राष्ट्रवाद पर प्रश्नचिन्ह लगाना जनता में उनके प्रति गलत सन्देश दे रहा है कि ए मात्र अपने निजी एवँ दलगत स्वार्थ सिद्धि के लिए मोदी जी को सत्ता से हटाना चाहते हैं।वहीं राष्ट्रवाद पर खरा उतर रहे मोदी जी एवं भाजपा में जनता का विश्वास बढ़ता ही जा रहा है। देश विदेश के सारे सर्वेक्षणों में  मोदी जी के सामने पसंदगी में किसी नेता का न टिक पाना ;इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।चुनाव जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है भाजपा का राष्ट्रवाद प्रखर राष्ट्रवाद का रूप लेता जा रहा है और मतदाताओं को भी इसमें भारत की बुलंद तसवीर दिख रही है। इसके विपरीत विपक्षी अनेक प्रकार के गठजोड़ ,झूठे वादे व जातीय समीकरण के बल पर सत्ता पाने का हर हथकंडा अपना रहे हैं।

वर्तमान चुनाव में विपक्षी मात्र मोदी विरोध और मोदी हटाओ अभियान पर केंद्रित हैं तथा इसके लिए इन लोगों ने अभूतपूर्व ढंग से पूरे देश में असमतल ध्रुवीकरण किया है।सारा खेल जनता समझ रही है। सभी दलों के कथनी ,करनी और विश्वसनीयता पर भी मन्थन हो रहा है और सभी चैतन्य मतदाता इस बात से चिन्तित हैं कि ए विपक्षी राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर ढुलमुल क्यों हैं। यदि विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा एवँ क्षमता मोदी जी के नेतृत्व में बढी है तो विरोधियों द्वारा मुक्त कण्ठ से उसकी प्रशंसा क्यों नहीं होती है। प्रशंसा करते हुए भी तो विपक्षी इस मुद्दे को राष्ट्रहित के सन्दर्भ में और आगे बढ़ाने की बात कर सकते हैं।ऐसा भी नहीं कि ए विपक्षी यह नहीं जानते कि राष्ट्रवाद क्या है और इसके विरुद्ध आचरण करने वाले को क्या कहा जाता है। फिर भी  सारे विपक्षी राष्ट्र द्रोहियों का समर्थन करते हैं क्योंकि उन्हें जातिवाद और मुस्लिमवाद पर भरोसा रहा है और अब भी है। हिन्दुओं के मत को जाति के नाम पर तितर वितर करना ,मुस्लिमों के मत का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करना और चुनाव जीतकर सत्तासुख भोगना ही इनके लिए राष्टवाद है।फिर देश और देश का भविष्य ? ऐसी परिस्थिति में हर भारतीय जागृत मतदाता समझता है कि यदि किसी राज्य की व्यवस्था ढुलमुल हो जाय , वंशवादी सत्ता में जड़ें जमा लें, बहुमत के लिए जाति और धर्म की चाल चलें, धर्म निरपेक्षता के नाम पर बहुसंख्यकों का निरादर हो और देश की सीमाएँ असुरक्षित रहें तो राज्य के अस्तित्व पर संकट मँडराते हैं।समय की माँग है कि विरोधी अपने आचरण और मुद्दों में सकारात्मक बदलाव लाएँ  और राष्ट्रवाद को अपने मन ,कर्म और वाणी में वैसे ही बैठा लें जैसे कि श्री मोदी ,एक सीमा प्रहरी सैनिक या एक आम राष्ट्रवादी  नागरिक। राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद है और इसका अर्थ भी राष्ट्रवाद है ,इसके दाएं बाएँ कुछ नहीं।यह राष्ट्रवाद प्रखर तो हो सकता है परन्तु ढुलमुल कदापि नहीं।

***************वस्तुतः जिस राष्ट्रवाद ,प्रखर राष्ट्रवाद या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आज चतुर्दिक चर्चा है इसका उद्भव भाजपा के पैतृक सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयँसेवक संघ के विचार धारा रूपी प्रांगण से हुआ। फिर  संघ ने उद्देश्यों की समग्र उपलब्धि के लिए अनेक और सगठन खड़ा किया जिसमें राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूर्व की जनसंघ आज की भाजपा बनी।वर्षों राष्ट्रवाद का ध्वज लिए अनवरत चलते हुए यही  भारतीय जनता पार्टी न केवल भारत या विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है अपितु  सवा सौ करोड़ भारतीयों के गौरव को बढ़ाते हुए उनके आकांछा को परिणाम के धरातल पर उतारने वाली इकलौती राष्ट्रीय पार्टी है तथा श्री नरेंद्र मोदी इस दल के यूएसपी हैं। इनके कथनी करनी और विश्वसनीयता पर आम लोगों का जाँचा परखा भरोसा है।इस दल में न वंशवाद है न तुष्टिकरण है।यहाँ न छद्म धर्म निर्पेक्षता है और न भ्रष्टाचार। विगत पाँच वर्षों में भाजपा सरकार ने आवश्यक आवश्यकता जैसे बिजली ,सड़क ,आवास ,शौचालय  रसोई गैस,स्वच्छता पर ध्यान दिया जिससे भारत में विकास की एक अच्छी यात्रा हुई। अनुकूल समर्थन से अन्तरिक्ष विज्ञानिकों ने कई मील के पत्थर गाड़े। आतंक और नक्सलवाद पर अंकुश लगा। सैनिकों का सम्मान बढ़ा और सीमाएँ जबरदस्त ढंग से जल ,थल ,नभ में सुरक्षित हुई हैं। बढ़ती सामरिक और आर्थिक शक्ति के साथ साथ सफल विदेश नीति से आज पूरी दुनियाँ में भारत के नागरिकों के साथ सम्मान का व्यवहार हो रहा है। देश विदेश जहाँ कहीं भी हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जाते हैं;  मोदी- मोदी के नारों से उनका स्वागत होता है।आचरण की शुद्धता के साथ श्री मोदी में नेतृत्व ,सूझबूझ और निर्णय की अतुल्य क्षमता है जो उन्हें अन्य नेताओं से बहुत ऊपर प्रतिष्ठित करती है। यही कारण है कि प्रधान मंत्री की दावेदारी में वे निरंतर पहली पसंद बने हुए हैं।नव भारत में राष्ट्रवाद की पर्याय बन चुकी भाजपा यदि सोना है तो श्री मोदी सोने में सुहागा। अस्तु यदि भाजपा पुनः सत्ता में लौटती है तो अगला पाँच वर्षीय कालखण्ड देशवासियों की आकांछा पूर्ति वाला स्वर्णयुग हो सकता है।     

 

आज के उद्धरण

1 . राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद है और इसका अर्थ भी राष्ट्रवाद है ,इसके दाएं बाएँ कुछ नहीं।यह राष्ट्रवाद प्रखर तो हो सकता है परन्तु ढुलमुल कदापि नहीं।

नव भारत में राष्ट्रवाद की पर्याय बन चुकी भाजपा यदि सोना है तो श्री मोदी सोने में सुहागा। अस्तु यदि भाजपा पुनः सत्ता में लौटती है तो अगला पाँच वर्षीय कालखण्ड देशवासियों की आकांछा पूर्ति वाला स्वर्णयुग हो सकता है

 

 

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