blogid : 6240 postid : 180

क्या कहें साहब !!

Posted On: 11 May, 2012 Others में

आईने के सामनेसामयिक मुद्दे पर लिखी गयी ब्यंगात्मक रचनाएं

manojjohny

73 Posts

227 Comments

हम अपने देश के हालात ! क्या कहें साहब !!

दिल में जलते हुये जज़्बात! क्या कहें साहब !!

इतने सालों की, जम्हूरियत का, हासिल क्या?

झूठे वादों की है सौगात ! क्या कहें साहब !!

इतने सालों में, बस मोहरे सी बनी है जनता,

ये सियासत की है बिसात! क्या कहें साहब !!

बच्चियाँ गर्भ में ही मार कर, नौरात्रि मनाएँ,

चढ़ती  दहेज  से बारात ! क्या कहें साहब !!

सिमट चुकी है शहर तक ही, तरक्की की चमक,

और गांवों की सियह-रात ! क्या कहें साहब !!

भूंख,  महँगाई,  भ्रष्टाचार, हर तरफ फैले,

ये सुलगते से सवालात! क्या कहें साहब !!

कहीं तो कर्ज तले, दब के किसान मरते हैं,

कहीं पैसों की है बरसात! क्या कहें साहब !!

अब शहीदों के तो, सब घर भी हड़प जाते हैं,

नेता, बाबाओं की औकात! क्या कहें साहब !!

आज भी योग्यता को, जातियों से हम मापें,

सबकी पहचान बनी जात! क्या कहें साहब !!

सुनाऊँ चीख किसे, ‘जानी’ सभी बहरों में,

ना करें देश की हम बात! चुप रहें साहब !!

हम अपने देश के हालात ! क्या कहें साहब !!

दिल में जलते हुये जज़्बात! क्या कहें साहब !!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग