blogid : 6240 postid : 155

जिस दिल पे हमको नाज था....

Posted On: 18 Feb, 2012 Others में

आईने के सामनेसामयिक मुद्दे पर लिखी गयी ब्यंगात्मक रचनाएं

manojjohny

73 Posts

227 Comments

जिस दिल पे हमको नाज था, ये दिल वही रहा।

अब  ये  भले ज माने के, काबिल  नहीं रहा।

कुछ  तो  जमाने  का भी है, कसूर इश्क में,

दिल को ही दे कसूर जो, वो गालिब नहीं रहा।

औरों के रहमो-करम से, पहुंचे जो बुलंदी पर

मैं उस जमात में कभी, शामिल  नहीं  रहा।

शहरों के और मशीनों के, कचरों से पटे हैं।

मौजें सकूँ से देखें,  वो, साहिल नहीं रहा ।

धोखे, फरेब दुनिया में, खाये कदम – कदम

छानी है खाक दुनिया की, काहिल नहीं रहा।

चंगुल में चंद लोगों के, जम्हूरियत   हुई

और बाकियों को कुछ भी, हासिल नहीं रहा ।

कातिल को रोकने की, जुर्रत ना किया ‘जानी’

कैसे कहूँ वो कत्ल में,  शामिल  नहीं  रहा ।

Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 4.85 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग