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ओसामा बिन लादेन या ओबामा बिन लादेन....

Posted On: 10 May, 2011 Others में

चिठ्ठाकारीNew vision of life with new eyes

Manoj

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ओसामा बिन लादेन की मौत से दूनियाभर में जश्न का माहौल सा बन गया है. सबको लगता है कि उन्होंने जंग जीत ली है. आतंकवाद के खात्मे तक के कयास लगाए जा रहे हैं. लोग ओबामा को उनकी सफलता के लिए तमाम बधाइयां और आगे के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं. ओसामा बिन लादेन दुनिया में अमेरिका विरोधी हवा चलाने में सबसे अहम माना जाता है. लोगों का सीधा कहना था कि ओसामा बिन लादेन दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी है. लेकिन कहते हैं ना कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं. ऐसे ही इस इंसान के भी दो पहलू हैं जो इस बात को स्पष्ट करते हैं कि ओसामा बिन लादेन अगर क्रूर और हत्यारा था तो दुनिया भर में जो उसे मारने को लेकर इतना हो हल्ला कर रहे हैं वह उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक और बेरहम हैं.


ओसामा तो मर गया पर बहुत बड़ा सवाल यह बाकी है कि क्या अमेरिका अब इराक और अफगानिस्तान से अपनी सेनाएं हटा लेगा या पहले की तरह ही उन पर दमन की नीति कायम रखेगा.


obama-bin-ladenओसामा बिन लादेन ने जब अमेरिका में हमला किया था तो करीब 3,000 लोग मारे गए थे. इस एक हमले से अमेरिका इतना बौखला गया कि उसने इराक और अफगानिस्तान को बंजर कर दिया. जिस इराक में कल तक तेल के कुंए होने की वजह से पैसों की बरसात हुआ करती थी उसी इराक में आज चप्पे चप्पे पर अमेरिका के कुत्ते घूमते नजर आते हैं. अमेरिकी सैनिकों ने मानवाधिकारों की किस तरह धज्जियां उड़ाई हैं इसके बारे में सब जानते हैं लेकिन सबको यही लगता है कि कुछ अच्छा करने में अगर दाग लगते हैं तो दाग अच्छे हैं.


और अफगानिस्तान में तो अमेरिका के कारनामो की तो पूछो ही मत. जिस देश में कल तक लोग अपनी संस्कृति पर गुरूर करते थे उनकी संस्कृति को उनके ही सामने नंगा कर दिया. अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना ने पूरे इलाके को बंजर कर दिया. आतंक और मौत का ऐसा सन्नाटा फैलाया कि सबकी रूहें कांप गईं. अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान को धूल में मिटा कर रख दिया.


अगर हम ओसामा बिन लादेन को आतंकवादी मानते हैं तो फिर ओबामा को क्यूं महान मानते हैं. ओबामा से पहले जॉर्ज बुश ने भी दुनिया में तबाही और गुंडागर्दी की नई कहानी शुरु की थी जिसके विरोध में पूरी दुनिया आ गई थी लेकिन ओबामा ने उसे रोकने की जगह उसे और हवा दी जिसका नतीजा यह हुआ कि दुनिया से ना ही आतंकवादियों का आतंक खत्म हुआ और ना ही उग्रवाद को रोका जा सका इसके उलट कई निर्दोष लोगों को बलि का बकरा बना मौत के घाट उतार दिया गया.



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