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धनखड की बरात

Posted On: 7 Jul, 2014 Others में

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manoranjanthakur

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ओम प्रकाश धनखड जी, यह वही बिहार है जहां बिहारशरीफ के एक रिक्शा चालक को भरी नींद उसके गुप्तांग में स्टील का ग्लास घुसेडा जाता है. मधुबनी के बाबूबरही ससुराल गए एक नवविवाहित दुल्हे चंदेश्वर को बंधक बना लिया गया. उसकी जमकर सालों ने पिटाई की. भूखे रखा.यह वही बिहार है जहां मामूली जमीनी विवाद में महिलाओं की हत्या हो रहीं. नवविवाहिताएं रोजाना दुल्हन की सेज में ही दहेज की खातिर अग्नि में सुला दी जाती हैं. नकली दवाओं से सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज हो रहा है. यहां के वित्त मंत्री के नाती तक को अपराधी बख्शने को तैयार नहीं, अपहरण कर ले रहे हैं. कमंडल का इलाज मंडल से करने की तैयारी है. ऐन मौके पर आप शादी कराने की बात छेड दी. शहनाई बजेगी बिहार में यह सुखद है. जाट लडके यहां आएंगे. आप इन्हें जरूर लाएं.घबराइएगा मत, बिहार में दुल्हे की नाक पकडकर शादी के मंडप पर ले जाने का संस्कार है ऐसे में लालू से डरने की जरूरत भी नहीं. वे नाक भी काटेंगे आखिर वो भी हरियाणा के समधि हैं. वहीं से दुल्हा लाएं हैं. आपको दिक्कत भी नहंी होगी. फिर केंद्र में मोदी आपके नजदीकी और प्रदेश में दूसरे मोदी आपके मित्र. बस, एक काम कीजिएगा, वाजपेयी के जमाने राजग 1 वाले हेलीकाप्टर पर बारातियों को लाइएगा. वैसे भी, केंद्रीय मोदी के एक महीने में नयापन, कोई तेवर, खास सरोकार ऐसे नहीं दिखे जिससे देश का सीना छप्पन इंच का हो सके. भारत के भीतर, आतंरिक या विदेश नीति में कोई सुधारात्मक बदलाव के संकेत भी नदारद. देश उसी दोराहे, तंग हालात में खडा दिखा, दिख रहा है जहां पाक से गलबाहियां, दोस्ती की गलतफहमी, चीन की होशियारी, दगाबाजी उसी मोड पर है जहां अबकी बार मोदी सरकार या सदाबहार कांग्रेसी सरकार थी. फर्क बस इतना, कांग्रेसियों की कभी जासूसी नहीं हुई अबकी बार गुजरात से लडकी क्या निकली अमेरिका भी जासूसी करने लगा. शरीफ से साडी व शाॅल का आयात-निर्यात भी उसी सरीके गोया, बेनजीर व राजीव गांधी की हाथ मिलाती, मुस्कुराती कोई तस्वीर या अटल-मुशर्रफ की पागलखाने आगरा से प्रेम, मोहब्बत का पैगाम और उधर, कारगिल की सौगात. बात वही है. भाजपाई मंत्रीमंडल में रेपिस्ट यूं ही खुशमिजाज, देह मोचन कर रहे मानो कांग्रेसी नारायण दत तिवारी सौ साल के करीब या दिग्गी राजा सरकार से हटते ही घर बसा लिए हों सांसदों के फेहरिस्त में आपराधिक चरित्रों की कतार मानो राहुल बिल फांड दिए हो या तालिबान कसाब का पाठ आतंकी को पढा रहा हो. ऐसे में गंगा पर थूकना क्या ना थूकना क्या…जैसे राजीव का सपना उमा पूरा करने चल पडी हों. गंगा निर्मल होगी या फिर फाइलें स्वच्छ हो जाएंगी बात शंकराचार्य के साई प्रेम सरीखे ही जो विवाद, बहस, आस्था से खिलवाड से ज्यादा कुछ भी नहीं. बिजली, पानी, रेल, आम महंगाई की फजीहत यूं ही बाबस्त है जैसे गुजरात में अबकी बार मोदी सरकार व दिल्ली राजधानी में कांग्रेसी सरकार 24 घंटे बिजली देने का दावा करती, दिखती, मिलती हों. हां, अच्छे दिन क्या आए बिहार से बिजली ही चली गयी. नीतीश का जदयू क्या हारा मानो बिजली ही यहां हार गयी. अब तो मुंह भी नहीं दिखाती बेचारी. केजरीवाल की ललसायी, गपशप से उबरी जनता मोदी शहद से ऐसी चिपकी जहां मिठास कम उलझने ज्यादा सता रही. हद यह, रोने के बहाने भी वहीं हैं जो कांग्रेसी जमाने में थे. कमजोर मानसून, सूखे की आशंका, इराक संकट, कंगाल माली हालत. सवाल यही, तो क्या सोचकर आए थे- मनमोहन खजाने छोडकर जाएगा. अरे जिस देश में बूढी, विधावाएं, लाचार, अबला महिलाएं पेंशन की आस में झुकी कमर, टूटी लाठी के सहारे धुंधली होती आंखों पर चश्मा निपोडे बाबूओं के दफतर से हांफती, निराश लौटती हांे और यौवनाएं घूंघट की आड में वृदधावस्था पेंशन उठाती हो, मनरेगा की मस्ती में बैठे बैठाए कमाई करने वाली, दलालों के आगे अंगूठा लगाती महिलाएं सुबह दो रूपये चावल व गेंहू का औधन चढाती हो, पति कमाई की रकम जगह-जगह शराब के ठेके पर उडाता घर लौटता हो. वहां उस देश में विकास कम, लीवर में सूजन स्वभाविक. हालात यही, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी भारत की संविधान सरीखी हो गयी है. इसे खत्म करना ना तो अबकी बार मोदी सरकार ना ही सदाबहार कांग्रेसी सरकार के बूते है. यह देश वही है जहां राम मंदिर बना नहीं, ध्वस्त बाबरी मस्जिद का ढाचा कहीं दिखा नहीं बावजूद मुजपफृपुरनगर के बहाने, कहीं गोधरा तो भागलपुर दंगे के सिरहाने मानवता एक अदद इंसान की बोली जरूर लगती, मिलती, दिखती है. सवाल फिर वही, कब जागेगा इस देश का मुसलमान! फुर्र से बिहार भाजपा को मोनाजिर हसन सरीखे झंडू बाम क्या मिल गया मुस्लिम धु्रवीकरण का अहसास जाग उठा. देश वही है. हालात भी वही. राजनेता से लेकर हुक्मरान, गांव-जवार के जनप्रतिनिधि, गली के मुखिया से आम लाचार आदमी तक पूरा जमात, कुनबा भारत का आज रसास्वादन, उसी पर आमादा है. ऐसे में खोखली अर्थव्यवस्था की दीवार को लांधना, उसे पाटना, अबकी बार ना सदाबहार के लिए बेहद नामुमिकन,असंभव. सबसे अधिक मध्यमवर्ग को पीसना है वही अब तक पिसता आया है, रहेगा. आलू, प्याज, चीनी के देश में भंडार रहते दाम बेशुमार और सरकार लाचार यही शुरू से खिस्सा भी है और साफगोई भी. देश के लोगों में धैर्य नहीं है. कल तक चुनावी सभाओं में दहाडने वाला शेर आज मौनी बाबा बन चुका है. गरीबों की सेहत मंद पडने लगी है और अमीरों की बस्ती दो लाख के निवेश पर टैक्स ्रफी का मजा उठा रही हैैं. भाजपा के पुरोधा शानदार, असंभव जीत से फीलगुड का आनंद उठा रहे हैं मानो गृहमंत्री राजनाथ सिंह कहते मिले, नक्सली से तो बाद में बात कर ही लेंगे अभी पांच साल बचा है. मगर ये जीत सुशासन और नरेंद्र मोदी की है, इधर, हताश, निराश कांग्रेस आत्ममंथन की मुद्रा में राहुल में नेतृत्व गुण विकसित करने को लेकर अपने राज्यपालों की हैसियत के बारे में सोचने को विवश. इंडिया सचमुच शाइनिंग हो रहा हैे यह तो आगामी कुछ राज्यों के विधानसभा में ही दिख जाएंगे फिलहाल भाजपा वहां अपने सीएम के दावेदारों से तो दो-दो हाथ कर ले. जहां फीफा के गाने फलाॅप हो चुके और सकीरा ला..ला..ला..गाने की तैयारी में है गोया आरकुट के बंद होते ही देश के महामहिम टिवटर पर अवतरित हो उठे हो.
प्रीति जिंटा के औरत होने का दर्द समझने को कोई तैयार ना हो और अभिनेता तापस की रेप कराने की धमकी सामने. जहां खुले में शौच करती महिला देह को निहारते नाक पर रूमाल रखे पौरूष गंध के आगे दिल्ली विश्वविद्यालय की तीन या चार वर्षीय कोर्स की पचरे से भागती कम पढी-लिखी शिक्षा मंत्री खडी मिलती हो. या फिर फलैश बैक…
भीड से हर जगह बार-बार सवाल पूछते, भ्रष्टाचारियों को जेल में होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए…24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी
चाहिए… के सपने दिखाते, सुनाते चुनाव पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी सब्जबाग दिखाते वही केजरीवाल सरीखे इलाज की जरूरत किसी को खांसी कहीं कम सोने की बीमारी, कहीं रंगीन मफलर, कहीं चटकदार कुर्ते, कहीं कुर्ते की बांह चढाते युवराज सभी के स्वभाव एक…जनता भी एक…देश की बीमारी, मर्ज भी एक…

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