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सपनों का मर जाना

Posted On: 29 Oct, 2013 Others में

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manoranjanthakur

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बिसात बिछी है। सिंहासन खाली है। चंदा का धंधा चोखा चल रहा है। हुंकार रैली के नाम पर भाजपा विधायक रमा देवी बतौर रंगदारी पांच लाख रीगा चीनी मिल मालिक से मांगती, मिलती हैं। पांच रुपए की टिकट पर नेता कठपुतली की नाच या मौत का कुंआ देखने का मजा दे रहे। पहले पर्व-त्योहारों में ये मजा मिलता था। अब लोकतंत्र में नेता का भाषण सुनने के लिए पांच की टिकट पहली बार एक देश में सुना, देखा जिसका नाम इंडिया, भारत है। यहां सभा में भाषण सुनाते हैं बाबा रामदेव। खर्च भाजपा उठाती है। राजीव गांधी पर हमला करने वाला श्रीलंकाई नौ सैनिक विजिता रोहन विजेमुनी ज्योतिष बन भविष्यवाणी करता मिलता है, भाजपा सत्ता में लौटेगी। राहुल 2019 में प्रधानमंत्री बनेंगे। यह सब यहीं संभव है। जहां एक गुजराती अखबार में इश्तेहार छपता हो मैं,नारायण साई निर्दोष हूं। निर्दोष बाथे नरसंहार के सभी आरोपी भी थे। दाऊद भी हैं। भारत के पैसे से पाकिस्तान की सरकार वहां की सैनिकों के पेट भर रहे हैं। आखिर, गरीबों को रॉबिनहुड से उम्मीद शुरु से ही है, रही है। अकेला एक अक्षय कुमार ही नहीं हैं जो बॉस का पोस्टर छपवाकर गिनीज में जा सकते हैं। महिलाओं के खुले बदन पर मोदी भी हैं। चोली व बल्ब वाले लहंगों पर मोदी। खूब छककर पहने जा रहे हैं मोदी। पहले 2007 में मुखौटे में थे। अबकी 2013 में स्टीकर वाली टी शर्ट, कुत्र्ते व साडिय़ों के बाद गरबा महोत्सव में टैटू वाले मोदी मिल रहे। खुली बदन व बल्ब वाले लहंगों में अपनी पीठ को नमोमयी किए महिलाओं के साथ। आखिर गुजराती एम्बेसडर अमिताभ की फिल्म याराना की देन है ये बल्ब वाली ड्रेस जो हॉट मल्लिका शेरावत की होटेस्ट बैचलर मोदी को गद्दी सरीके अंदर से स्पंजी किए उछला भी रहा और अंदरखाने दिल्ली पहुंचने की चाह में जल्दबाजी भी लिए हुए है। जहां दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों में खुद को फिट नहीं कर, रख पाने की चिंता भी सामने। कर्नाटक में दो फाड़ होती भाजपा। आंध्र के विभाजन से उपजे सवाल। तमिलनाडु में मजबूत सहयोगी की किल्लत के बीच आंध्र में तेलगुदेशम। तमिलनाडु में एमडीएम व कर्नाटक में येदियुरप्पा की वापसी की कम होती उम्मीद लिए चद्रंबाबू के साथ से पार्टी में विरोध, बगावती स्वर को थामने, रोकने की कसमकस भी। कोने में बैठी जयललिता एक अलग ही मुसीबत। बेहतर संबंध, पुराने रिश्ते की दुहाई के बाद भी मोदी से चुनाव पूर्व संपर्क, पास फटकने देने को कतई तैयार नहीं। बाइको पर नजर रखें तो खफा होने वालों की लंबी फेहरिस्त। आखिर क्या करें मोदी। बात, उसी यूपी की सभा में कांग्रेस के युवराज ने उठायी। कहा, दंगा नेता करवाते हैं। अब मोदी भी उसी सुर में अलाप रहे। वो भी उसी कानपुर की जमीन पर तमाम विवादों के बीच कहते मिले, दफनानी होगी वोट बैंक की राजनीति। जनाब, द इकोनोमिस्ट ने 2 दिसंबर 12 को ही नरेंद्र मोदी को भाजपा व पी.चिदबंरम को कांग्रेस का पीएम घोषित कर दिया था। बावजूद, आज तक कांग्रेस का पीएम कैंडिडेट टॉप सीक्रेट है। आप ओपन, खुलेआम डंके की चोट पर पीएम की कुर्सी के लायक खुद को समझ रहे। यह भूलकर कि अहमदाबाद की गलियों से दिल्ली की दूरी नापने में अभी वक्त है। लगातार सर्वे का अनुमान, नमो की छवि, देश की राजनीति में घुसपैठ, पूरी तरह समायोजित, सही तरीके से तत्काल हजम होता, तैयार नहीं दिख रहा।
सपने देखना अच्छी बात है। शोभन सरकार के सपने में क्या दिखा। वही सोने की चमक यानी अकूत अर्थ। इसी सपने को साकार किया, देखा अगरतला के माकपा नेता समीर अचार्जी ने। खुद को लाखों के नोटों की गड््ियों पर सो गए। बीस लाख बैंक से निकाल उसे बिस्तर बनाया सो गए। जगे तो पार्टी से बाहर। उन्नाव में गोल्डेन विलेज पर नजर नहीं होती तो आज संभल के असमोली में एक खेत से मुगलकालीन 20 सिक्के कैसे मिलते। बिहार के मधुबनी जिले के करीब दो हजार वर्ष प्राचीन बलिराजगढ़ में नवंबर में खुदाई शुरू होने की बात नहीं होती। वहां मानव सभ्यता के 2200 साल पुराना विकास का इतिहास दफन है। पूर्व में 1962 में हुई खुदाई में यहां पानी निकल जाने के बाद भी ईसा पूर्व दूसरी सदी के अवशेष मिले थे जो सोने से कहीं कीमती।
सपने देखना हर भारतीयों का अधिकार है। अब मोदी सपने देख रहे और भारतीय उपमहाद्वीप में मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन कहे जाने वाले जमीयत उलेमा-ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों को नाकारात्मकता की बुनियाद पर नहीं बल्कि साकारात्मकता के साथ मोहपाश में बांधने की वकालत की तो हाय तौबा क्यों? सही है, सेकुलर दलों को मुसलमानों का वोट पाने के लिए मोदी का भय दिखाने की जरूरत क्या, क्योंकर है। मुसलमानों के ही कंधे पर सेकुलारिज्म का बोझ आखिर कब तक? ऑल इंडिया पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक नोहा का तर्क भी परोक्ष में, मोदी की करनी व कथनी में बहुत अंतर, फर्क है। इसे बदलें नहीं तो वोट ढ़ंूढ़ते रह जाओगे। बात में दम है। एक दिन पहले के मोदी कहते हैं, दुनिया हमारे ऊपर इस बेबुनियाद कार्य के लिए हंस रही है। किसी को सपना आया और सरकार लग गयी खुदाई में। अगले दिन के मोदी को देखिए, मैं शोभन सरकार को प्रणाम करता हूं। उनपर लाखों लोगों की श्रद्धा है। ये उलटबाजी कहीं सपने देखने का फलसफा तो नहीं।
ऐसे में, 5 राज्यों में विस और आम चुनाव सिर पर आते ही मुसलिम मतदाताओं को सपने कौन दिखा रहा? पहले मारो, फिर इंसाफ, उसके बाद राजनीति का दौर। ध्रुवीकरण का खेल। भाजपा पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप, कांग्रेस पर हवा देने का आरोप। सवाल वही सपने, जनता को दिखाने, सेहत तंदुरूस्ती का है। जेठमलानी ने कानूनी अंदाज में बोलना शुरू किया। पार्टी से बर्खास्तगी पर भाजपा संसदीय बोर्ड को अदालत तक घसीट लाए। आखिर पार्टी के बुजुर्गवाद के प्रतीक राम ने भी तो पार्टी व खुद के लिए सपना ही देखा था। आज 50 लाख मुआवजे मांग रहे। यानी उस सपने की कीमत महज 50 लाख। इसी अर्थ तंत्र में ऐश्वर्या राय बच्चन भी मिल रहीं। अभिषेक का ऑन लाइन चेहरा देखकर करवा चौथ का व्रत तोड़तीं। मोनिका बेदी के बाद अपनी बेटी आराध्या की स्टेम सेल को संरक्षित, प्रीजर्व करवातीं। अब भाई, सेरोगेसी तो सुना था ये प्रीजर्व की प्रक्रिया, इसका विज्ञान, तकनीकी, फैशन ट्रेंड, समझ आम लोगों को तो है नहीं।
चलिए, राहुल ने कहा, सपने बड़ा होगा तो बदलाव होगा। यानी, सपने अमूल बेबी भी देख रहे। 2014 में चुनाव जीतने की नहीं बल्कि भविष्य के लिए लंबी सोच के बारे में लोगों को बताने के लिए। डरते हुए कि देश को बांटने वाले, हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने वाले दादी, पापा की तरह उन्हें भी मार डालेंगे। गोया, सीज फायर उल्लंघन करती पाक की फौज हो जो गृहमंत्री के सामने, मौजूदगी में ही करती हो फायरिंग और दो जवान सामने हो जाते हों शहीद। जख्मी 18 सैनिकों का हाल पूछने जाना पड़े अस्पताल। खूनी खेल का सपना तालिबान भी देख रहा। वॉर ऑन द रॉक्स में अमेरिकी विशेषज्ञ की चेतावनी कि भारत को निशाने पर लेने को तैयार है तालिबान। यह उसी दिन से दहशतगर्दों के सपने में है जब मनमोहन तालिबानी दौरे पर गए थे। वहीं सपने सरीके, एलएसी पर
टकराव को टालने को भारत-चीन के बीच सीमा सुरक्षा करार का कोई नया खेल। यह देखते कि रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन भारतीय जल सीमा पर 19 चीनी सेटेलाइट की लगातार नजरें गड़ाए रहने से चिंतित है।
सपने तख्त पर बैठने के लिए भी आ रहे हैं। दिल्ली की गलियों में झाड़ू मारता मिलता कोई आम आदमी या बहस को तैयार आम आदमी का नेता कोई केजरीवाल हो। बेशकीमती गाड़ी से उतरकर विकास की अमर कहानी लिखती, सुनाती शील-सुसज्जित बुजुर्ग महिला या मुख्यमंत्री का दावेदार दागदार हाथों उर्फ विजय से छीनकर हर्ष को सौंपती जीत की सपने बुनती भाजपा। भई, पीएम
कोयला कालिख में लागा चुनरी में दाग की जांच को तैयार हो गए हैं। अब जगह-जगह धड़ाधड़ खुल रहे नमो टी स्टॉल पर कड़क चाय की चुस्की मारिए और देखिए कैसे सबसे खतरनाक होता है हमारे जिंदा सपनों का मर जाना…। दीपावली पर अपने मायके पाकिस्तान गयी एक हिंदू महिला को निर्वस्त्र कर लोग पीट रहे हैं। आप भी जल्दी-जल्दी सपने देखिए। मत भूलिए, सपने देखने का अधिकार आपसे बहुत जल्द छीन जाने वाला भी है। लंदन में वैज्ञानिकों ने कृत्रिम इंसान पैदा कर लिया है। धड़कता है पुरजोर उसका दिल। रगो में दौड़ता है खून भी। बस, त्वचा और दिमाग तैयार करना शेष है फिर वो भी देखेगा सपना। दुखद यही, होगा मसीहा सामने तेरे…पर वो नहीं सुन, देख सकेगा कभी अब सपना। ए मेरे प्यारे वतन…मन्ना दा नहीं रहे। तुमी जाबे कोथाय मन्ना दा… शत-शत प्रणाम।

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