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कम सीखा तो क्यों और पूरा सीख गया तो कैसे ?

Posted On: 23 Mar, 2010 Others में

प्राइमरी का मास्टरआदर्शों और वास्तविकताओं के मध्य एक प्राथमिक शिक्षक का श्यामपट

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

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यदि आप थोड़ा सा भी सोंचे तो पायेंगे कि मानव किसी न किसी रूप मे अपना मूल्यांकन करता आया है और उस मूल्यांकन के आधार पर अपनी जीवन की दशा और दिशा को निर्देशित करता आया है। हम यह भी जानते हैं की एक ग़लत मूल्यांकन किसी के भी जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। फ़िर जब बच्चों की बात हो हो तो यह अति आवश्यक है की उनका मूल्यांकन सोच समझकर , कई अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं को ध्यान मे रखकर किया जाए क्योंकि आपके और हमारे द्वारा किया गया बच्चों का मूल्यांकन , बच्चों की जीवन दशा को बदलने की क्षमता रखता है।

 

गणित की शिक्षा अभी तक मैंने जो भी बात कही वह बच्चों के इर्द – गिर्द ही रही है , परन्तु यह विचारणीय है की क्या वास्तव मे मूल्यांकन सिर्फ़ बच्चों का ही होता है ? आप और हम अपने दिन याद करें। आप को सिर्फ़ एक-दो शिक्षक ही क्यों पसंद आते थे और उन शिक्षकों द्वारा पढाये गए विषयों मे आप अव्वल आते थे , परन्तु अन्य विषयों मे उतने अच्छे नहीं थे।  इससे कम से कम यह तो पता चलता है कि कमजोर आप नहीं थे…  परन्तु कहीं न कंही गडबडी तो हुई पर कंहाँ ? कैसे?  क्या दोष शिक्षक मे था या शिक्षक द्वारा अपनाई गई शिक्षण पद्दति का या मूल्यांकन करने वाली विधि का या कँही और ?

यह गंभीर तथा विस्तृत विश्लेषण ही निर्णय देने का आधार बन जाएगा कि वास्तव मे बच्चा कितना सीख पाया। अगर कम सीखा तो क्यों और पूरा सीख गया तो कैसे?


मूल्यांकन सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु पह्चाने जा सकते हैं :-

  • मूल्यांकन से निकली हर जानकारी का उपयोग किया जाए।
  • बच्चों को आपस मे भी मूल्यांकन करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
  • शिक्षक अपने /अन्य विद्यालय के शिक्षकों के साथ बैठकर स्वयं का मूल्यांकन करे।
  • मूल्यांकन बच्चों मे एक कौशल के बाद दूसरा कौशल विकसित करने मे सहायक हो।
  • यह महसूस करना और कराना आवश्यक है कि मूल्यांकन भी पाठ्यक्रम का एक हिस्सा , इसे उभारना आवश्यक है।
  • मूल्यांकन बच्चों मे डर पैदा करने वाला न हो ,वरन इसे वे खुशी – खुशी स्वीकार करले / इसके लिए आवश्यक है की इसे पूर्ण व रोचक बनाया जाए।
  • प्रारम्भ मे ही यह स्पष्ट किया जन चाहिए की मूल्यांकन केवल बच्चों का ही नहीं होता वरन बच्चों द्वारा शिक्षकों का भी होता है।
  • इसी प्रकार समुदाय द्वारा भी शिक्षकों , बच्चों की उपलब्धियों तथा स्कूल का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।

 

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