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आजकल के 'मम्मी - डैडी'

Posted On: 13 Dec, 2014 Others में

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meenakshi

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आजकल के मम्मी – डैडी
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मुझे भली भांति याद है आज से कई वर्ष पूर्व एक टी .वी.शो में -जिसमें बच्चों का डांस प्रोग्राम आता था मैंने देखा – एक बहुत प्यारी नन्न्हीं बच्ची ने एक वयस्क या कहूं कि अश्लील गाने पर नृत्य किया था . बच्ची ने गजब का डांस किया था .

सभी ने तब भी तालियां बजायीं थीं . परंतु जब डांस खत्म हुआ तो शो के मंच पर आसीन जज (निर्णायक )ने पूछा कि- ये डांस तुम्हें किसने सिखाया है ? नन्हीं बच्ची ने जवाब दिया -“मेरे पापा “ने ।

(निर्णायक )जज हैरान थे ! तब उन्होंने उसके पिता से उसी समय  टी.वी.शो में कहा था – कि कृपया अपने बच्चों को ऐसे (अश्लील ) गाने पर नृत्य ना सिखायें”। और.. बहुत.. कुछ ..कहा..समझाया था . शायद सभी विचारशील व समझदार व्यक्ति इस बात से सहमत भी दिखे .परंतु….शायद थोड़ी देर के लिये …कोई व्यापक असर नही दिखा.वरना फिर वैसी पुनरावृत्ति ना दिखायी देती .

उस समय तो प्रोग्राम के जज ने ये बात कह भी दी थी ,आज तो सभी लोग मजे लेते हैं चाहें वहां बैठें हों या घर पर बैठे दर्शक हों .
आज कल के मम्मी डैडी बच्चों के पीछे पड़ गये हैं मानो…पढ़ाई कम शो बाजी पे ज्यादा प्रेशर डालते हैं. कितने बच्चों को तो बी.पी. की शिकायत ,सिरदर्द ,नर्वसनेस और ना जाने क्या..क्या…परेशानिया..बीमारियां होने लगी हैं..
आज कैसे भी अधिक से अधिक लोगों की निगाहों में छाएं …कैसे अधिक से अधिक पैसा कमाया जाय …सही -गलत से कोई सारोकार नहीं ..बस यही एक होड़ दिखायी देती है . खुद तो खुद अपने बच्चों को भी इसी दौड़ में दैड़ाते हैं .तो फिर भविष्य कैसा होगा ?

आजकल के मम्मी -डैडी अपने बच्चों के साथ मानो अन्याय कर रहें हैं – प्रदर्शन की होड़ में अपने बच्चों के जीवन से , उनके बचपन से मजाक कर रहे हैं ; प्रतीत होता है.


बढ़ते टेलीविजन प्रोग्राम ,विज्ञापनों एवम चलचित्रों का खास कर बच्चों में बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है.क्योंकि इनसभी में अच्छी बातें कम और ..और बातें अधिक दिखायी देती हैं.

जिनके प्रभाव से बच्चों का बचपना गुम होता जा रहा है . बच्चे छोटी उम्र में सयाने होने लगे हैं .
वैसे भी सामान्यत: अच्छाइयों का प्रभाव कम पड़ता है या देर से पड़ता है .

इस देश का भविष्य उज्ज्वल होगा, बहुत संदेह नज़र आता हैं क्यों ? क्योंकि जहां के माता -पिता ही अपने बच्चों को ऐसे ऐसे अश्लील गानों पर नृत्य करते देख फूले नहीं समाते कि…
तो निश्चित है बच्चों को जैसा मार्गदर्शन मिल रहा है ; उनका भविष्य ….. .
आज के बच्चे ही कल के नागरिक जिसपे ..समाज..का..और देश का भविष्य टिका होता है तो कैसा होगा अभी से प्रतीत हो रहा है !

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मीनाक्षी श्रीवास्तव

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