blogid : 4431 postid : 1338885

हरित सावन मनभावन ....

Posted On: 9 Jul, 2017 Others में

KALAM KA KAMALJust another weblog

meenakshi

160 Posts

978 Comments

“हरित सावन “

आप सभी स्नेहीजनों जनों को  पावन – सुहावन “सावन / श्रावण मास”  की  मंगलकामनाएं !

सावन /श्रावण  मास प्रारम्भ हो रहा है . सावन माह के  बारे  में अनेक  पौराणिक  प्रसंग और कथाओं का उल्लेख मिलता है . मैं सावन/ श्रावण मास को “अपने विचार” से – इसका अर्थ एवम इसका प्रभाव अपने शब्दों में अभिव्यक्त करने का प्रयास कर रही हूँ ..

शाब्दिक अर्थ :
1- ) सावन = सा + वन
               सा = सुन्दर , सुहावना , वन = हरा भरा , हरियाली से भरपूर .

2-)  श्रावण 
        श्रा = श्रंगार , सजा ,सुशोभित , वन = हरियाली , हरीतिमामय .

अर्थात सावन मास में प्रकृति हमारी  धरती ऐसी  हरी भरी दिखायी देती है मानो श्रंगार कर सजी सँवरी सुशोभित हो रही होती  है जो हर किसी के मन को सुहावनी लगती है ; चाहे हो मानव हो या  फिर पशु पक्षी . सम्पूर्ण द्रश्य सुन्दर सुहावना मनभावन प्रतीत होता है . “सम्भवतः इस समय की प्रकृति की इस खूबसूरती के कारण ही इस मास का नामकरण ” सावन / श्रावण  रखा  गया हो” .

मैंने  देखा है – “यूँ तो सम्पूर्ण प्रकृति व ‘धरती’ सदैव सुंदर लगती है; किंतु वर्ष में दो बार  कुछ  विशेष रूप से हमारी धरती सजती – धजती है, संवरती है . एक  – ” बसंत ऋतु ” में जब प्रकृति /  हमारी धरती  नवयौवना रूप में मानो अवतरित हुई जान पड़ती है ; और दूसरी “सावन / श्रावण  मास ” में जब यह बिल्कुल हरी भरी .. हरीतिमा ओढ़े सुहानी सलोनी सुंदरी सी नजर आती है .”

कल दिनांक 10’जुलाई 2017-  से सावन /श्रावण  मास प्रारम्भ हो रहा है . जो नित्य सबके मन को सुहावना लगेगा . सबको हर्षौल्लास से भरपूर रखेगा .

जैसा कि हम सभी अवगत  हैं हमारी भरतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में हर माह विशेष देवी देवता कि पूजा अर्चना की  जाती है . सावन माह में विशेषकर  “शिव जी” “भोलेनाथ” की पूजा  अर्चना होती है .ऐसा मानना है कि – सावन मास  “शिव आराधना” का  है . लोग पूरे माह  मुख्यत: सोमवार को शिव दर्शन कर जप तप और व्रत करते हैं . घर – मंदिर में शिव आराधना  भजन – कीर्तन इत्यादि करते  हैं.

अनेक भक्तजन  कांवरियों  में गंगाजल भरकर “जय भोले नाथ ” / “बम बम भोले ” इत्यादि भक्तिभाव से जयकारा लगाते हुए अनेक शिवालय में जाकर शिव जी को जल अर्पण करते हैं … जलाभिषेक करते हैं . इस प्रकार से यह सावन मास बड़ा  पावन मास कहलाता है .

सावन – पावन – मनभावन पावस ऋतु में आता  है इसलिए इसमें वर्षा अपना सुन्दर रंग रूप दिखाती है , कहते हैं ; धरती से अम्बर का मिलन होता है .
कहीं सुन्दर तो कहीं भयंकर .(भयंकर का तात्पर्य _ बाढ़ इत्यादि से है  )

वैसे देखा जाय तो सचमुच सावन बड़ा ही सुन्दर सुहावना मास होता है . सभी के हृदय को प्रफुल्लित रखता है .सभी (बच्चों से बुजुर्गों  तक)  हर प्रकार से हरे भरे हो जाते हैं.

प्रायः सावन में बच्चों के भीतर का उत्साह उनकी कागज की  नाव को पानी  या छुटपुट जलाशय  में तैराने का देखा  जाता है . हल्की बारीश तक उनका  क्रिकेट चलता रहता है इत्यादि अनेक बालमन की उमंग देखी जाती है .
और ऐसे सावन में नन्ही बालिकाएं गुड़िया गुड्डा या अपने किचन सेट खिलौनों को अपनी फ्रेंड के साथ खेलती दिखायी देती हैं . उनको झुला झूलना बहुत पसंद होता है . घर में वो अपने पापा / माँ से कह कर कभी हठ  करके  झूला पेड़ में डलवाती हैं और खुशी से झूलती हैं ..शोर मचाती हैं उनकी ….खिलखिलाहट जो सबको प्यारी लगती है .

सावन में -नवयुवक एक अलग ही स्टाईल / भाव में खोये खोये नज़र आते हैं. ऐसे में ये लोग  लगभग हर समय  गीत गुनगुनाते रहते हैं .गीत गाना और सुनना दोनों बहुत भाता है . और बहाने से बारीश में भीगना अच्छा लगता है ..प्राकृतिक आकर्षण से आकृष्ट हुए नजर आते हैं .

षोडशी यानी नई उम्र की दहलीज में क़दम रखने वाली लड़कियाँ. जो मन ही मन हरित सावन में कुछ  ज्यादा ही तरंगित रहती हैं .उनका मन नित नव रूप में दिखना अर्थात …वह .बहुत प्रकार से सजती – संवरती रहती हैं .  हरी चूड़ियां हरे , हरे परिधान ,मेहन्दी लगाना ,सावनी गीत गाना , नृत्य करना , सावनी फुहारों में भीगना, झूला झूलना ,रीझना – रिझाना और बात बात में शरमाकर लाल हो जाना दिखाई देता है .

इस माह में अनेक पर्व होते हैं-  सावनी तीज , गुड़िया , रक्षाबंधन इत्यादि . युवतियां व सुहागिन स्त्रियाँ इन पर्वों को लेकर भी काफी उत्साहित रहती हैं .
त्यौहारों में विविध प्रकार के व्यंजन बनाना- खाना -खिलाना साथ ही उपहार देना लेना शौक से करती हैं .
प्रायः इन दिनों लड़कियाँ अपने मायके कुछ दिनों के लिये चली जाया करती हैं ,पर्व मनाने ,  लाड़ दुलार पाने और आराम के पल व्यतीत करने .
वैसे सावन में मायके वाले भी अपनी बेटियों को पर्व के बहाने अपने पास कुछ दिनों के लिये बुला लेते हैं ताकि  उनकी बेटियां कुछ दिन उनके पास भी रह सके …

सावन मास -“पावस ऋतु ” के अन्तर्गत आता है . अर्थात वर्षा होती है , ‘जल बरसता’ है.  देखा जाता है कि  जहाँ एक ओर सावन में  श्रंगार रस छाया दिखायी देता है वहीँ दूसरी ओर  विरह वेदना से व्याकुल विरहिणियों के नैनों से ‘जल बरसता’ देखा जाता है .

सावन में कवि और रचनाकार  अपनी अपनी कल्पना को नित नये रंग रूप देकर साहित्य भण्डार को  और अधिक सम्पन्न बनाते रहते हैं व अपनी छाप छोड़ते रहते हैं . जिसका प्रभाव अनेक सदियों  तक देखा जाता है .

गौर करें तो सावन बुजुर्गों  के लिये उनकी सुनहरी यादों को पुनः जीवंत रूप में लेकर आता है . उनको हर समय बीती यादों में भीगोये रखता है .
उन्हें अपने बचपन से लेकर अपने बच्चों के बचपन तक की सभी बातें ..यादें रह रह कर बाध्य करती हैं उन्हें मुस्कराने के लिये …हाँ कभीकभी उनकी आँखों को नम होते भी देखा जाता है .

अतः कह सकती हूँ कि सावन हम सभी को पूरी तरह प्रभावित करता है .
और इस प्रकार मेरे दृष्टिकोंण से रिमझिम हरित सावन / श्रावण मास अति सुन्दर – सुहावन – पावन – मनभावन होता है .

इति ll
___________________

( साभार – चित्र के लिये नेट – गूगल को )

मीनाक्षी श्रीवास्तव

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग