blogid : 23463 postid : 1305575

सिंदूरी लाल

Posted On: 6 Jan, 2017 Others में

SAITUNIKHINDI POEMS & Blogs

meetagoel

52 Posts

52 Comments

सबकी आँखें हो रहीं हैं सिंदूरी लाल
लहू के कतरे तैर रहे हैं आँखों में आज
क्रोध की सीमा लाँघ रही है सरहद को आज
बंदूकों के शोर से गूँज रहा है आसमान आज
शहीदों की इस अंतिम यात्रा में शामिल हैं सभी आज
वीरों की जय जयकार से सराबोर है वातावरण आज
औरतें बच्चे बूढ़े सभी हुए हैं गमसार आज
सबकी आँखें हो रहीं हैं सिंदूरी लाल
गली के चप्पे चप्पे में उमड़ रहा है हुजूम
भीगी आँखों से देने विदाई आया है ये जनसमूह
कलेजे को चीर कर रख देने वाली ये जंग है
अपनों को अपनों से दूर कर देने वाली ये जंग है
सिपाही की शहादत को सिर माथे पर रखते हुए
इस वीर की देश भक्ति को नत मस्तक करते हुए
सबकी आँखें हो गईं हैं सिंदूरी लाल
लहू के कतरे तैरते दिख रहे हैं इन आँखों में आज
लहू के कतरे तैरते दिख रहे हैं इन आँखों में आज
कवयित्री – मीता गोयल
meetagoel.in

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग