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यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं

Posted On: 22 Feb, 2012 Others में

साधना के पथ परअद्य की स्याही

सूफ़ी ध्यान श्री

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जीने की चाह है तो मरने की परवाह न कर ,
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं.
याद रहें हर पग पे उंगली उठेगी,
हर पग पे बाधाएँ आएँगी,
पर विचलित मत होना ऐ पथिक;
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं.

कहता है कुछ, करता है कुछ,
खुली आँख, बंद दिमाग,
यही इसकी निशानी है ,
फिर तुझको क्या हैरानी है;
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं

स्मरण रहें यदि तुम हो सही ,
इसकी तू परवाह न कर ,
गर आत्मा साफ है तेरी,
चारों धाम की चाह न कर;
तू सही, तेरी मंजिल सही,
दर्द भरी आह! न कर;
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं.

याद रहे जिस सीता को,
माता कहकर बुलाता है,
उसपे कलंक लगाया,
यहाँ यह स्थान एक माता का,
फिर तेरा मन क्यों घबराया;
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं.

मंजिल उसी को मिली यहाँ,
जो उसूलों की खातिर,
जान की बाजी लगाया;
मरने से तू भयभीत न हो,
तू एक सच्चा पथिक,
जो अपना मार्ग स्वयं बनाया,
अब मंजिल करीब है तेरी,
फिर क्यों शीश झुकाया ;
यह हमारा समाज है, कोई गीता और कुरान नहीं.


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