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पहली बार मिले हो मुझसे - गीत

Posted On: 1 Jul, 2012 Others में

दिल का दर्पणJust another weblog

Mohinder Kumar

41 Posts

783 Comments

हर मनुष्य के जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जिनसे वह किसी का परिचय नहीं करवाना चाहता. कभी कभी तो वो खुद भी यादों के उन गलियारों में जाने से बचता है. इसी भाव से इस गीत का जन्म.. आप इसे पढ कर और नीचे दिये लिन्क पर सुन कर बताईये.. आपको कैसा लगा.

पहली बार मिले हो मुझसे
तुमको क्या बतलाऊं मैं
भीतर से हैं बंद दरवाजे
जिन्हें खोल न पाऊं मैं
पहली बार मिले हो मुझसे

दर्दों की परतें दर परतें
और यादों के लगे हैं जाले
खुद भी जहां नहीं.. जाता मैं
तुम्हें कैसे ले जाऊं मैं
पहली बार मिले हो मुझसे

चांद सरीखा उसका चेहरा
मेरी आंखे थी भर बैठी
नित नया सपना मुझे रुलाये
ऊपर से मुस्काऊं मैं
पहली बार मिले हो मुझसे

ना खत, ना कोई तस्वीरें
ना.. सूखे फ़ूल किताबों में
साथ मेरे ईक बीता कल है
जिसको भूल न पाऊं मैं
पहली बार मिले हो मुझसे

उम्मीदों से मुझे है दहशत
और रिश्तों से डर लगता है
हिस्से, टुकडों में बंटा हुआ हूं
खुद को जोड न पाऊं मैं
पहली बार मिले हो मुझसे

पहली बार मिले हो मुझसे
तुमको क्या बतलाऊं मैं
भीतर से हैं बंद दरवाजे
जिन्हें खोल न पाऊं मैं. 

मेरा लिखा गीत – “पहली बार मिले हो मुझसे” आप इस लिंक पर सुन सकते हैं.

http://dilkadarpan.blogspot.in/2010/11/blog-post_25.html

मोहिंदर कुमार
http://dilkadarpan.blogspot.in

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