blogid : 13246 postid : 1321467

और फिर तू विजेता बनी ... "contest "

Posted On: 29 Mar, 2017 Others में

कुछ कही कुछ अनकहीसुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

mrssarojsingh

185 Posts

159 Comments

रास्ता लम्बा होगा और मुश्किल भी ,
यह जानती थी मैं ,
पर तेरी मासूम मुस्कुराहट और ,
तेरी आँखों की चमक ने मुझे जो हिम्मत दी ,
उसने मुझे एक नयी हिम्म्त दी ,
मेरी बेटी तुमने ही मुझे जीवन की चुनौतियों से लड़ना सिखाया ,
रिश्तो के नए अर्थ समझाये ,
मैं अकेली थी ,
तू मेरी गोद में थी ,
इसलिए मैं अकेली थी ,,,
सारे अपनों की भीड़ में ,
मैं बिलकुल अकेली थी ,
साथ होकर भी कोई साथ न था ,
तब,
हाँ तभी ,
उस अकेले पल में तू ही मेरा सहारा बनी ,
और हम दोनों चल पड़े उस लम्बे रास्तों पर ,
धीरे धीरे रास्ते आसान होते चले गये ,
तूने जीवन में नई ऊँचाईया हासिल की ,
नये मुकाम पाए ,
और फिर वो पल आया भी जब तुझे ,
अपने जीवन के नये सफर पर निकलना था
मुझे छोड़ कर जाना था
तुझे विदा करना का समय आ गया
पर मैं कमजोर होकर कर आंसू नहीं बहाऊंगी,
बल्कि मुस्कुरा तुझे विदा करूंगी ,
क्योंकि तूने ही मुझे जीना सिखाया ,
मेरे साथ चली मेरी हिम्मत बनकर ,
तब ,
जब हम दोनों अकेले थे ,
सब के बीच में अकेले थे ,
पर हम चले दोनों ……लम्बे रास्तों पर ………..कंटीले रास्तो पर ………अकेले ……….
और फिर तू विजेता बनी ,
मुझे भी विजेता बनाया ,
अब तू अपने नये सफर को शान से शुरू कर ,
और नये मुकाम हासिल कर ,
अब मैं ,
हाँ मैं वो हिम्मत और सहारा तुम्हे दूंगी ,
जो अपने जन्म के समय तुमने मुझे दिया था ,
तुम कभी अकेली नहीं होगी …..किसी पल भी अकेली नहीं होगी ,
क्योंकि मैं तुम्हारे साथ सदा रहूंगी ,
तेरी माँ बन कर नहीं ,
तेरे लिए हिम्मत का पहाड़ बन कर ,
गर्म हवा के किसी झोंके को तेरे पास नहीं आने दूंगी ,
कभी तुझे उस अकेलेपंन से नही गुजरने दूंगी ,
जिससे मैं गुजरी हूँ ,
हम दोनों का रिश्ता माँ बेटी का नहीं है ,
अकेले मुश्किल पलों में सहारा बनने का है ,
शायद दुनिया की हर माँ बेटी का यही रिश्ता ,
लम्बे ,कंटीले रास्तों को तय करने की हिम्मत देता हैं ,

(आज भी हमारे समाज में बेटियों के जन्म पर ऐसे कठिन पल आते हैं जब सारे अपने छिटक कर दूर हो जाते हैं /तब सारी भावनाओं को भुला कर एक माँ पत्थर बन कर लम्बे कंटीले ,पथरीले रास्ते को चुनती है और चल पड़ती है गोद में लेकर एक नन्ही जान को जिसे वो जब एक डॉक्टर /इंजीयर /आर्मी ऑफिसर /पुलिस ऑफिसर बना देती है और तब वो ही सब अपने जो उसके जन्म पर दूर हो गये थे ,उसी बेटी की सफलता पर साथ खड़े होकर उसकी एक बड़े पल का हिस्सा बनना चाहते है ,उसके साथ रिश्ते बनाना चाहते हैं ,,,, तस्वीर खिंचवाना चाहते हैं ,,,,,,,,)
कितनी बड़ी विडंबना है हमारे तथाकथित सभ्य समाज की ………

कविता के रूप में आपबीती ………….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग