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मरने से भी डरते हैं......

Posted On: 27 Mar, 2017 Others में

कुछ कही कुछ अनकहीसुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

mrssarojsingh

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मरने से भी डरते है
और मुश्किल है जीना भी

रूठे जब सागर, रूठे
मौज़े और सफीना भी

कातिल से ही सीख गए
हम चाक ज़िगर सीना भी

बेबाक सही अदा तेरी
रख इक पर्दा झीना भी

कांच से भी कमतर फिर तो
नकली गर हो नगीना भी

खुदगर्ज़ी छोड़, सीख जरा
हंस कर मरना जीना भी

सरोज सिंह
मेलबर्न
ऑस्ट्रेलिया

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