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सच की तलाश

Posted On: 7 Jul, 2014 Others में

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Imam Hussain Quadri

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आज हम ऐसे हालात से गुज़र रहे हैं जिन हालात में हमें सबसे पहले खुद को देखना चाहिए के हमारी भलाई और उन्नति किस में है हमारी पहचान और हमारा फ़र्ज़ क्या है जिस तरह हम किसी भी चीज़ को अपनाते हैं या हासिल करते हैं तो उसका एक मक़सद होता है जैसे अगर घर बनाते हैं तो ये मक़सद होता है के हम आराम से रहेंगे बारिश धुप और आंधी से महफूज़ रहेंगे मगर जब घर बन कर तैयार हुआ तो उसमे धुप की गर्मी भी आ रही है बारिश होने पर चूता भी है हम चैन से सो नहीं पाते आंधी आने पर घर हिलता भी है डर लगता है तो हमें फ़िक्र होती है के क्या करें उसको फिर से तोड़ कर बनायें हमारी म्हणत और हमारे पैसे बेकार गए और हम खुश नहीं होते हमें तकलीफ होती है ठीक उसी तरह से हमने कभी सोचा है के हमको जिसने भी एक सिमित ज़िन्दगी देकर दुनिया में भेजा है ये तो सच है के कोई न कोई है जो इस पूरी ज़िन्दगी और पूरी दुनिया का मालिक है और सबको एक ने ही जन्म दिया है और हमसे कुछ न कुछ चाहता है कुछ न कुछ मक़सद होगा क्यूंकि उस से बड़ा कोई नहीं है जो पूरी दुनिया को अपने हिसाब से चला रहा है और हम में से ही रोज़ी और ज़िन्दगी का एक दूसरे को जरिया बना रखा है जिसे हम अपनी अपनी ज़बान में उसको अलग अलग नाम से पुकारते हैं कोई ईश्वर कहता है तो कोई अल्लाह कहता है कोई गॉड कहता है वो उसका भी ईश्वर है जो उसे मानता है वो उसका भी ईश्वर है जो नहीं मानता जिसे नास्तिक कहते हैं तो अब ये सवाल पैदा होता है के वो चाहता क्या है उसकी मर्ज़ी क्या है वो कैसे हमसे खुश रहेगा और हम कैसे उसको खुश रखेंगे उसके नियम क्या हैं कौन है जो उसकी पहचान सही कराये उस तक हमको पहुंचाए जो निरंकार है मगर है तो उसकी पहचान तो हम नहीं कर सकते मगर यक़ीन करना ही होगा के वो है अब उस से अच्छा कौन है जो ये बताये के उस ईश्वर के बाद जितने भी हैं सब उसी ईश्वर की पूजा इबादत और आज्ञा के मैंने वाले एक जैसे हैं अब उस ईश्वर ने जितनी भी चीज़ें पैदा की हैं उन सब में सबसे बड़ा और महान इंसान मनुष्य को बनाया क्यूंकि मनुष्य सभी को अपने प्रयोग में लाता है ज़मीन से अपनी रोज़ी पैदा करता है आसमान से इंसान के लिए ही पानी बरसता है और ज़िन्दगी को गिनती करने और म्हणत और आराम के लिए उसी ईश्वर ने इंसान के लिए ही चाँद और सूरज बनाया छोटे बड़े पेंड और पौड़ी भी इंसान के लिए ही बनाया जिस से हम अपने काम में लाते हैं इसी लिए मनुष्य को अशरफुल मख़लूक़ात ( जितनी भी चीज़ें दुनिया में हैं सबसे महान और सरदार मनुष्य है ) कहा गया है . अब इंसानो को सही रास्ता दिखाने और अपनी पहचान करने के लिए मनुष्य में से ही किसी को ऐसा बनाया जो सबको सच की दावत दे और उसकी बंदगी और पूजा का तरीका सिखाये उनको अवतार या नबी और पैग़म्बर कहा गया जो हम सबसे ऊपर और महान हैं मगर उनकी पूजा या इबादत करने से मन किया गया क्यूंकि वो भी उसी की पूजा और इबादत करते हैं जिसकी पूजा और इबादत के तरीके सीखने के लिए उनको बनाया गया और वो भी उसी की इबादत और पूजा करते थे और हैं क्यूंकि वो भी उसी के पैदा किये हुए हैं इस तरह एक के बाद एक आते गए और हम सबको उस अल्लाह या ईश्वर के बारे में बताते गए और बताते रहेंगे जिसको इस्लाम कहता है के सबको अल्लाह ने अपनी इबादत और बंदगी के लिए पैदा किया और वही पूजा या इबादत के काबिल है क्यूंकि वही सबका मालिक और देख रेख करने वाला और पैदा करने वाला है जिसने अच्छे काम के लिए सवर्ग और बुरे काम के बदले नरक बना रखा है जिस पर सभी एक मत और एक राय हैं ईश्वर और सवर्ग और नरक पर सभी का विश्वाश है क्या ये सच है के नहीं ? .

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