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स्वर्ग और नर्क - Jagran Junction Forum

Posted On: 21 May, 2011 Others में

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narayani

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स्वर्ग और नर्क
मेरी बड़ी माँ – मेरी ताई जी हमे जीवन के अच्छे बुरे का फर्क बताती. संयुक्त परिवार में बड़े होने का सबसे ज्यादा असर बच्चो पर होता है.
उनको सबके सानिध्य का, सब के विचारो का अलग अलग रूप देखना,सुनना मिलता है, जो आगे जाकर जीवन में कई बार काम आता है.

ऐसे ही, एक बार, बचपन में उन्होंने एक कहानी सुनाई थी, जिसका सारांश था की बुरे काम की बुरी सजा.
अगर हम चोरी करेंगे तो उपर भगवान के घर नही – हमे नर्क में जाना पड़ेगा. यदि हम झूठ बोलेंगे तो हमारी जबान कट जाएगी, यदि किसी गरीब या दिन दुखी को दुःख दिया तो हमे उनकी हाय लगती है, उनकी बद दुआ लगती है और इसकी भी भगवान सजा देता है. चोरी करने वालो के नर्क में दोनों हाथ कट देते है. झूठ बोलने की सजा होती है नर्क में जाकर जबान कट जाना. किसी को तिनके से भी जलाओ तो उपर नर्क में हमे खोलते तेल में डाल दिया जाता है. मंदिर से फूल भी तोडना पाप होता है. अपने पास यदि इतना खाना है की हम उसको बाँट कर खाए तो बेटी जिन्दगी में भगवान हमे भी कभी भूखा नही रखता . जो अबला स्त्री पर अत्याचार करता है वो अगले जन्म में नपुंसक होता है. बचपन में स्त्री पर अत्याचार का मतलब मारने पीटने के अलावा कुछ समझ नही आया और ना ही उसकी सजा का मतलब समझ आया. पर उस सबक को याद रखते जो जीवन अभी गुजर रहा है तो हर पल यही लगता है की बड़ी माँ फिर से जन्म ले ले, क्योकि वो जो सबक सिखा गयी वो तो हमारी उम्र का एक दशक भी न गुजार सका. अब बड़ी माँ वापस दुनिया में आये और देखे की उनके सबक अब हम किस रूप में देख रहे है, अब का स्वर्ग नर्क आप जल्दी आकर देखो बड़ी माँ .
पहले का सबक झूठ बोलने पर जबान कट जाएगी
अभी का सबक, सच बोलोगे तो जबान क्या कटना, जान ही कट जाएगी .
पहले का सबक, गरीब की हाय न लेना
अभी का सबक, उनकी हाय से तो साब फल फूल रहे
पहले का सबक, चोरी करने पर दोनों हाथ कट जायेंगे
अब का सबक, चोर आपके हाथ भी काट कर ले जायेंगे
पहले का सबक, तिनके से भी दागा तो खौलती कढाई
अब का सबक, अपना हक भी मांगो तो जीवित ही झोपड़ियो में जलो
पहले का सबक, मंदिर से फूल तोडना भी पाप
अब का सबक, मंदिर से भगवान ही उठा लो
पहले का सबक, खाना बांटो तो पुण्य
अब का सबक, खाना छीनो तो पुण्य
पहले सबक, स्त्री का अत्याचारी नारकीय जीवन जीता है ,या नपुंसक होता है जिसका शब्द का अर्थ ही मालूम न था.
अब का सबक, स्त्री पर अत्याचार करने वाला सबसे बड़ा मर्द , जो इस समय सबसे ज्यादा अत्याचारी साबित कर रहा है
अपने आप को पुरुष रूप में धन्य कर रहा है, छोटी छोटी मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार करके.
अब इनकी सजा तो सरकार से गुजारिश है की पहले वाली रखे, बाकि तो जनता झेल रही है, पर मेरे देश के भावी कर्ण धारो को जनम देने वाली माताओ को तो सरकार सहेज कर रखे.

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