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ये जिन्दगी

Posted On: 7 Jan, 2014 Others में

expressionsMeri bhavnavon ko mile pankh

Noopur

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ये जिन्दगी न जाने कितने रंग दिखाती है।
कभी इधर गिराती तो उधर उठाती है।
आंसू भरती कभी दामन में,
कभी खुषियां बरसाती है।
दर्द दे कर खुद ही मरहम लगाती है।
कांटा चुभो कर पैर में
संभल कर चलना सिखलाती है,
अनुभवों के गहनों से सज संवर कर
बन नगीना चमक जाती है
जिन्दगी न जाने कितने रंग दिखाती है।
कभी इधर गिराती तो उधर उठाती है।

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