blogid : 25693 postid : 1354317

ऐ ज़िन्दगी, इतनी मेहरबानी करना...

Posted On: 19 Sep, 2017 Others में

meri nazar meri duniyaJust another Jagranjunction Blogs weblog

neetu

8 Posts

1 Comment

life


दोस्तों काफ़ी दिनों के बाद आज फिर अपने विचार आप लोगों से साझा करना चाहती हूं। यह विचार जीवन के परम सत्य “मृत्यु” से सम्बंधित है, जिससे कोई बच नहीं सकता। परन्तु यह विदाई कैसी हो, यह एक कविता के माध्यम से व्यक्त कर रही हूँ। आशा है आप सभी को यह पसंद आएगी।


ऐ ज़िन्दगी,
इतनी मेहरबानी करना,
जब अलविदा बोलूं तुम्हें,
(परिजन) अपने लोगों के होठों पर,
मुस्कान देखूं, सुकून देखूं।
आंसू भरे नेत्र तो हों,
पर ह्रदय में कोई कसक न हो।
अनगिनत इच्छाएं तो लगी रहती हैं,
पर कोई ऐसी अतृप्ति न हो,
जिसके बोझ से,

यह “विदाई” दुश्‍वार लगे।
शक्ति देना मुझे तुम इतनी,
कुछ ऐसा कर पाऊं,
विदाई की बेला में,
डूबते सूरज सी जाऊं,
जाने का ग़म तो हो,
मुझको भी और उनको भी,
पर सभी का जीवन सिन्दूरी कर पाऊं।

इतना अवसर अवश्य देना कि
उनका हाथ थाम, गिले शिकवे दूर कर पाऊं,
साथ बिताए प्यारे लम्हों को,
यादकर मुस्कुरा पाऊं,
जी भरकर देख लूं सभी को,
आखों में कैद कर लूं सभी के अंश को,
फिर तुम्हारे साथ उस अनन्त यात्रा
पर कदम बढ़ाऊँ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग