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“जिन्दगी कैसी है पहेली हाय कभी तो हसाए कभी ये रुलाए।“

Posted On: 25 Mar, 2012 Others में

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yogeshdattjoshi

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“जिन्दगी कैसी है पहेली हाय कभी तो हसाए कभी ये रुलाए।“

मेरा उद्देश्य इस गीत का प्रचार करने का नहीं बल्कि आपका मन हल्का करने का हैं। ताकि आप लोग स्वतन्त्र दिमाग से मेरे विचार पढ सके और अपने विचार रख सके।

“पुस्तके अच्छी मित्र होती है और एक अच्छा मित्र एक पूरा पुस्तकालय।“ एक वक्त था जब पुस्तको को ना केवल पढा जाता था बल्कि उनसे ज्ञान भी लिया जाता था। आज पुस्तक की वही जगह कम्पयुटर ने ले ली है। जहाँ पुरानी फिल्मों में मित्रता के सुन्दर पल और ख़ट्टे-मीठे किस्से होते थे। वहीं आज चैटिंग ने अपनी छाप छोड दी है। पुराने ग्रन्थों में भी मित्रता के कई प्रमाण मिलते है।

भारतीय समाज में मित्रता का अर्थ पुरुष की पुरुष से मित्रता और लडकी की लडकी से ही मित्रता को श्रेष्ठ माना जाता था। वहीं आज जब पुरुष को पुरुष के साथ अगर देखा जाता हैं तो उसे गे कहा जाता है। मजाक तक तो ठीक है पर जब एक ही बात बार सामने आती है तो एक चिढ बन जाती है। वहीं दूसरी और पुरुष और स्त्री की मित्रता को जहाँ अपवाद माना जाता था। आज उसे एक सम्मान माना जाता है।

स्त्री और पुरुष की मित्रता को सम्मान मिलना तो एक अच्छी बात है। पर दो पुरुषों की मित्रता को गे शब्द से सम्मानित करना क्या ठीक है?

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