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इस “दामाद” के लिए दूध-भात

Posted On: 8 Oct, 2012 Hindi News में

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robert vadraकांग्रेस की आलाकमान सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का मुद्दा धीरे-धीरे गहराता जा रहा है. जहां एक तरफ इस मामले में राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने वाले अरविंद केजरीवाल अपनी बात पर अड़े हुए हैं वहीं दूसरी तरफ सरकार के सभी रसूखदार रॉबर्ट वाड्रा के समर्थन में अरविंद की बातों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए निरंतर बयान बाजी कर रहे हैं. इसका एक और उदाहरण सोमवार को उस समय देखने को मिला जब केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रॉबर्ट वाड्रा के बचाव में आते हुए कहा है कि जब तक फायदे के लिए लेन-देन का विशिष्ट आरोप दायर नहीं किया जाता है तब तक निजी सौदे की जांच नहीं की जा सकती है.


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गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने मीडिया के सामने यह आरोप लगाया था कि डीएलएफ समूह ने गलत तरीकों से रॉबर्ट वाड्रा को 300 करोड़ रुपयों की संपत्तियां कौड़ियों के दाम बेचकर पैसे की हेरफेर की. उधर डीएलएफ ने भी अरविंद के इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि हमने वाड्रा और उनकी कंपनी को औने-पौने दाम पर संपत्तियां नहीं बेचीं.


अब सवाल यह उठता है कि अरविंद केजरीवाल जो कह रहे वह सच कह रहे हैं या फिर इस आरोप के पीछे उनकी राजनीतिक चाल है. अगर एक वक्त के लिए मान लें की अरविंद झूठे हैं तो सरकार को जांच कराने में दिक्कत क्या है. वह इधर-उधर की बातें क्यों कर रही हैं. वह यह जताने की कोशिश क्यों कर रही है कि रॉबर्ट वाड्रा किसी भी जांच के दायरे से बाहर हैं. वह जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दे. लेकिन जांच कराना तो दूर मीडिया के सामने कांग्रेस का हरेक नेता इस तरह से बयान दे रहा है जैसे रॉबर्ट वाड्रा (गांधी परिवार) का सबसे बड़ा हमदर्द वही है. कांग्रेस की इन नेताओं में वफादारी का बुखार इस कदर सर चढ़कर बोल रहा है कि वह रॉबर्ट वाड्रा पर लगे आरोपों की जांच पर बिदक जाते हैं.


यदि पूरे मामले को देखें तो एक तरफ अरविंद का बयान है तो दूसरी तरह उस बयान की मिट्टी पलीद करने के लिए कांग्रेस का हुजूम है. अरविंद का बयान इतना तीखा है कि कांग्रेस तो कांग्रेस उसकी पुरानी सहयोगी पार्टी भी जो सरकार में अपनी जगह तलाश रही है वह भी रॉबर्ट वाड्रा के बचाव में उतर आ गई है. हर कोई रॉबर्ट वाड्रा परे लगे आरोपों को नेस्तनाबूत करने की होड़ में लगा हुआ है. यहां एक चीज और…रॉबर्ट वाड्रा कोई बड़े राजनेता नहीं हैं वह एक कारोबारी हैं और अरविंद ने जो आरोप लगाया है एक कारोबारी पर लगाया है इसलिए सरकार का कर्तव्य है कि इस आरोप की निष्पक्षता से जांच कराए.


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