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वायरल हो रही बोर्ड की परीक्षा में नकल की इस तस्वीर के पीछे ये है सच्चाई

Posted On: 19 Mar, 2015 Hindi News में

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वर्षों से लोग कहते आये हैं कि विद्यार्थी समाज और राष्ट्र का निर्माता होता है. एक निपुण विद्यार्थी जहाँ समाज और राष्ट्र की सतत उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करता है वहीं एक कमजोर विद्यार्थी समाज की उन्नति में बाधक होता है. हमारे देश की वर्तमान शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान देने में कम और उनमें रटंत पद्धति के तीव्र विकास में सहायक ज्यादा है. इसका ताज़ा उदाहरण बिहार है जहाँ परीक्षा के नाम पर जो चल-चलाया जा रहा है वह हमारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने में सक्षम है.


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देश भर के लगभग सारे राज्यों में अभी बोर्ड परीक्षायें चल रही है. बिहार भी उन राज्यों से अलग नहीं है. लेकिन बिहार में परीक्षा के नाम पर जो कदाचार चल रहा है वो वहाँ की जड़ शैक्षिक व्यवस्था को आईना दिखा रहा है. नीचे लगी तस्वीर उस राज्य की वर्तमान शैक्षिक व्यवस्था का उदाहरण है जो कभी गुरूकुल की उत्कृष्टता के लिये जानी जाती थी.


chori chori khulle khulle


हम नकल करेंगे साथी अंक अधिक लाने को!

इस तस्वीर में दिख रही चारदीवारी बिहार के वैशाली के महनार अवस्थित विद्या निकेतन विद्यालय की है. पिछले 25 वर्षों से भी अधिक समय से सुचारू रूप से चल रहे इस विद्यालय में बोर्ड की परीक्षायें चल रही है. यह तस्वीर बुधवार की है जिस दिन गणित की परीक्षा तय थी. यहाँ परीक्षा दे रहे परीक्षार्थियों को उनके सगे-संबंधी विद्यालय की दीवारों पर चढ़कर नकल करने की सामग्री और पुर्ज़े मुहैया करा रहे हैं ताकि वो परीक्षा में अधिक अंक हासिल कर सकें.


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अभिभावकों की नैतिकता गर्त में जा चुकी है

लेकिन यह स्थिति प्रतीकात्मक है. प्रतीकात्मक इसलिये क्योंकि नकल के मामले में बिहार के कई जिलों के परीक्षा-केंद्रों की वस्तुस्थिति यही है. परीक्षा के शुरूआत से ही छात्र-छात्राओं के परीक्षा से निष्कासन की घटनायें अख़बारों की सुर्खियाँ बनते आ रही है. कई जगह स्थिति तो यह है कि नकल न करने देने के कारण विद्यार्थियों के परिजन पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर रोड़ेबाजी तक करते हैं.


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किसकी शह पर होता है यह सब?

इस मामले से उपजे कुछ महत्तवपूर्ण सवाल ये हैं कि क्या बिहार के जिलों में स्थानीय प्रशासन कदाचार मुक्त परीक्षा सम्पन्न कराने में असक्षम है? क्या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में योग्य प्रशासकों की कमी है? क्या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पर सरकार अथवा नेताओं का दबाव रहता है? क्या केंद्र अधीक्षकों पर कदाचार के विरूद्ध प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी कार्रवाई करने की मनाही होते हैं? Next….


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