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ममता और करुणा के लायक नहीं सरकार

Posted On: 19 Mar, 2013 Hindi News में

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karunanidhi upaकांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी, डीएमके ने अपने सभी मंत्रियों के साथ यूपीए सरकार से मंगलवार, 19 मार्च, 2013 को समर्थन वापस ले लिया. पिछले 6 महीने में कांग्रेस को इस तरह का दूसरा झटका लगा है. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संप्रग को गच्चा दिया था. हालांकि डीएमके ने 21 मार्च से पहले मांगों से संबंधित प्रस्ताव संसद से पास कराए जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का भी ऐलान किया है.


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क्या है मामला

गौरतलब है कि 21 मार्च को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक है जिसमें अमेरिका श्रीलंका में तमिलों पर हुए अत्याचार के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने जा रहा है. डीएमके की मांग है कि भारत न सिर्फ इस प्रस्ताव का समर्थन करे बल्कि इस प्रस्ताव को और मजबूत बनाने के लिए अपनी तरफ से कुछ बातें इसमें जोड़े. हालांकि करुणानिधि ने कहा कि वो यूपीए सरकार को बाहर से सशर्त समर्थन भी दे सकते हैं.


करुणानिधि को मनाने का दौर

इससे पहले डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि को मनाने का दौर चल रहा था.  चेन्नई पहुंचे उनके करीबी रक्षा मंत्री एके एंटनी, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी एवं स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के सामने करुणानिधि ने दो नई मांगें रखीं. उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिकी प्रस्ताव पर उनके द्वारा दिए गए दो संशोधन को मंजूर कर संसद से पारित कराने की मांग की.  पहले संशोधन में श्रीलंकाई सेना द्वारा तमिल ईलम पर हुए अत्याचारों को नरसंहार और युद्ध अपराध की श्रेणी में रखने की मांग. दूसरे सुझाव में उन्होंने कहा कि युद्ध अपराध, मानवता विरोधी अपराध, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के उल्लंघन व तमिलों के नरसंहार की समयबद्ध जांच के लिए विश्वसनीय व स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय आयोग गठित हो.


समर्थन वापसी के बाद

डीएमके द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार पर किसी भी खतरे से इन्कार करते हुए कहा कि सरकार इस संबंध में संसद में प्रस्ताव लाने को तैयार है. वहीं, बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि वह सरकार के साथ हैं.


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कैसा है समीकरण

डीएमके संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है. लोकसभा में डीएमके के 18 सांसद हैं और समर्थन वापसी के बाद सरकार के पास 224 सांसदों का ही समर्थन बचा है. हालांकि सपा, बसपा, राजद, जदएस के 61 सांसदों के बाहर से समर्थन जारी रहने से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यूपीए सरकार में डीएमके के कोटे से एक कैबिनेट और चार राज्यमंत्री हैं. सभी मंत्री आज शाम पांच बजे अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौपेंगे.


कांग्रेस को पहले भी धमकी

दरअसल पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस में सबसे ज्यादा चिंता एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके को लेकर थी. ऐसा इसलिए क्योंकि तमिलनाडु में जयललिता की अन्नाद्रमुक की बढ़ती मजबूती को देखते हुए डीएमके के कई नेता मानते हैं कि पार्टी को केंद्र सरकार से अलग होकर सड़क पर संघर्ष करना चाहिए. इससे अलावा डीएमके ने समय समय पर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरने और सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी.


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