blogid : 314 postid : 798

कबाड़ी की दुकान से रेस का मैदान, पर मंजिल....

Posted On: 12 Mar, 2011 Hindi News में

समाचार ब्लॉगदुनियां की हर खबर जागरण न्यूज के साथ

Hindi News Blog

1623 Posts

925 Comments

Hasan Aliपुरानी चीजों को खरीदने-बेचने से लेकर घोड़े की रेस पर दांव लगा कर बुलंदी के आसमान पर बैठने की हसरत ने हसन अली को जेल की चार दीवारी में पहुंचा दिया. छोटी सी दुकान से शुरु हुआ सफर किस तरह रेस कोर्स और फिर टैक्स चोरी तक पहुंचा यह कहानी बेहद लंबी और पूरा तरह फिल्मी है.

देश में टैक्सम चोरी के सबसे बड़े आरोपी हसन अली खान को अब पुलिस ने हिरासत में तो ले लिया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हसन अली की गिरफ्तारी पूरे तीन साल बाद कैसे हुई और उसकी गिरफ्तारी में इतनी देर क्यूं? सवाल और भी कई हैं पर हसन अली की कहानी से पता चलता है कि पैसे के बल पर किस तरह कोई भी भारत में कानून की धज्जियां उड़ा सकता है.

आखिर कौन है हसन अली

71 हजार 845 करोड़ रुपये सिर्फ टैक्स चोरी के सहारे बचाने वाला हसन अली हैदराबाद के उपनगर मुशीराबाद में एक मिडल क्लास फैमिली में पैदा हुआ था. हसन अली खान के पिता एक्साइज अफसर थे. घर के हालात ठीक थे लेकिन हसन अली की चाहत अधिक से अधिक पैसा कमाने की थी.

हसन अली ने अपने अरमानों को पूरा करने के लिए पहले हैदराबाद में ही रहकर पुरानी चीजों को खरीदने और बेचने का कारोबार शुरु किया और जब इससे उसके सपने पूरे होते ना दिखे तो उसने अपनी पहली पत्नी महबूबा खान को तलाक देकर पुणे आकर वहां घुड़सवारी सिखाने वाले फैजल अब्बास की बहन रहीमा से शादी कर ली. देश में कहीं भी होने वाले घुड़दौड़ में अक्सजर यह जोड़ी दिख जाती है. और हसन अली का कहना है यहीं से उसने घुड़दौड़ में घोड़ों पर दांव लगाना शुरु किया और इतनी सारी संपत्ति अर्जित कर ली.

अब जरा सोच कर देखिए जिसके ऊपर 71 हजार 845 करोड़ रुपए का सिर्फ टैक्स ही बकाया हो उसके पास संपत्ति कितनी होगी. एक घोड़े पर दांव लगाने वाला सौदागर खरबपति कैसे बन गया यह कहानी तो जल्द खुलेगी पर अभी हसन अली खान रिमांड पर चल रहा है.

और इस बार जब उसे ईडी और सीबीआई ने गिरफ्तार किया भी है तो जनाब के ठाठ किसी अमीर शेख से कम नहीं. भारत में होने के बाद भी हसन अली को कस्टडी में इंडियन टॉइलेट नहीं बल्कि सिर्फ वेस्टर्न स्टाइल वाला टॉइलेट ही इस्तेमाल करना था. और उसकी सेहत का ड्रामा तो पूछो ना.

इतना सब होने के बाद भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी और मुंबई पुलिस हसन अली के साथ सख्ती बरतने को तैयार नहीं. अब इसे पैसे का जलवा ना कहें तो क्या कहे? एक तरफ एक आम आदमी है जिसे उसके ऑफिस का कैशियर हर साल के मार्च महीने में टैक्स ना भरने से होने वाले नुकसानों की पट्टी पढ़ाता है और सरकार टीवी पर तरह-तरह के एड से डराती है कि टैक्स भरो वरना इनकम जब्त तो वहीं दूसरी तरफ हसन अली जैसे लोग हैं जो टैक्स चोरी करने के बाद भी उलटा सरकार को ही डरा कर रखते हैं. आखिर गलती कहां है? क्या वाकई भारत का पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो चुका है? खैर अब देखना है कि आगे क्या होता है.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग